दिखता नहीं ( ग़ज़ल )
या निहाँ हूँ या अयाँ दिखता नहीं ? या फ़क़त ये राएगाँ दिखता नहीं ? یا نہاں ہوں يا عیاں دکھتا نہیں یا فقط یہ رایگاں دکھتا نہیں उसके भीतर जा बसा हूँ इस क़दर दूसरा कोई जहाँ दिखता नहीं اسکے بھیتر جا بسا ہوں اس قدر دوسرا کوئی جہاں دکھتا نہیں जलता रहता हूँ मैं ख़ुद की आग में बस ज़माने को धुआँ दिखता नहीं جلتا رہتا ہوں میں خد کی آگ میں بس زمانے کو دھواں دکھتا نہیں घुल गई हो तुम यूँ जिस्म-ओ-जान में और कुछ भी जान-ए-जाँ दिखता नहीं گھل گئی ہو تم یوں جسم_و_جان میں اور کچھ بھی جان_جاں دکھتا نہیں दिखता है सब कुछ ख़ुदाया बस तुझे एक मेरा आस्ताँ दिखता नहीं دکھتا ہے سب کچھ خدایا بس تجھے ایک میرا آستاں دکھتا نہیں इश्क़ की ईंटें हुआ करतीं थीं जो वैसे ईंटों का मकाँ दिखता नहीं عشق کی عینٹیں ہوا کرتیں تھیں جو ویسے عیٹوں کا مکاں دکھتا نہیں कह दे ना गर है कोई मज़हब तेरा लड़ रहें मज़हब यहाँ दिखता नहीं ? کہ دے نا گر ہے کوئی مذہب تیرا لڑ رہیں مذہب یہاں دکھتا نہیں पाले हैं इतने मलाल-ओ-ग़म कि अब आस...