Posts

Showing posts with the label sher o shayri

साहिर लुधियानवी

साहिर तिलिस्मी थें या फिर मुझको सुख़न आया नहीं ساحر طلسمی تھیں یا پھر مجھکو سخن آیا نہیں — नज़र نظر

क़लम-दवात

फ़क़त मुझे तबाह करने आई थीं क़लम-दवात न शे'र-ओ-शायरी हुई , न फ़र्द कोई काम के فقط مجھے تباہ کرنے آئی تھیں قلم - دوات ن شیر و شاعری ہوئی ، فرد کوئی کام کے — नज़र نظر फ़र्द - Individual

कशमकश

न तेरे पास जाता हूँ  ,न ख़ुद के पास बैठा हूँ निकल के ख़ुद से फिर जाने ये किसके पास जाता हूँ न जाने कब तलक मैं बारहा यूँ करता जाऊँगा तेरे दर पे मैं जा-जा के जो वापस लौट आता हूँ ن تیرے پاس جاتا ہوں ، ن خد کے پاس بیٹھا ہوں نکل کے خد سے پھر جانے یہ کسکے پاس جاتا ہوں ن جانے جب تلک میں بارہا یوں کرتا جاؤنگا تیرے در پے میں جا - جا کے جو واپس قوت آتا ہوں — नज़र نظر बारहा - Again and again , बार - बार

ज़िन्दगी

ज़िन्दगी आसाँ तो थी मगर मुझको जीना ही आया नहीं زندگی آساں تو تھی مگر مجھکو جینا ہی آیا نہیں घर से दूर आया तो जाना ये मुझको सोना ही आया नहीं گھر سے دور آیا تو جانا یہ مُجھکو سونا ہی آیا نہیں वादे पे वादे करता रहा पर निभाना ही आया नहीं وادے پے وادے کرتا رہا پر نبھانا ہی آیا نہیں जो मुझे था पराया वो ही दरअसल था पराया नहीं جو مجھے تھا پرایا وو ہی دراصل تھا پرایا نہیں ज़िन्दगी आसाँ तो थी मगर मुझको जीना ही आया नहीं زندگی آساں تو تھی مگر مجھکو جینا ہی آیا نہیں ― नज़र نظر

निर्वाण

वो ही निर्वाण और वो ही है मेरी मोह-माया भी मेरी ये कश्मकश बाहम उसे छूना ओ पाना है وہ ہی نروان اور وہ ہی ہے میری موہ مایا بھی میری یہ کشمکش باہم اسے چھونا او پانا ہے — नज़र نذر निर्वाण - The state of peace and happiness achieved after giving up personal desires व्यक्तिगत इच्छाओं का परित्याग करने से प्राप्त शांति तथा ख़ुशी बाहम - Simultaneously

दिल

म'आनी शे'र में ढूँढ़ो या मेरी आँख में उतरो किसी भी तौर से लेकिन मुझे तुम पढ़ नहीं सकते معانی شیر میں ڈھونڈھو یا میری آنکھ میں اترو کسی بھی طور سے لیکن مجھے تم پڑھ نہیں سکتے म'आनी शे'र में ढूँढ़ो या मेरी आँख में उतरो मगर तुम किस भी सूरत दिल को मेरे पढ़ नहीं सकते معانی شیر میں ڈھونڈھو یا میری آنکھ میں اترو مگر تم کس بھی صورت دل کو میرے پڑھ نہیں سکتے — नज़र نذر

दर्द

दर्द का संभलना ज़रूरी होता है लहज़ा ए दर्द में कोई नहीं लिखता درد کا سنبھالنا ضروری ہوتا ہے لہذا ے درد میں کوئی نہیں لکھتا — नज़र نذر लहज़ा ए दर्द - Instant/Moment of pain 2222 2222 22

पर्दा-नशीनी

शरारत ज़ेहन की दिल से तो देखो छिप नहीं सकती तो फिर तुमसे भला पर्दा-नशीनी क्यूँ करें बोलो شرارت ذہن کی دل سے تو دیکھو چپ نہیں سکتی تو پھر تمسے بھلا پردانشینی کیوں کریں بولو ― नज़र نذر

मोहब्बत

मोहब्बत इसके आगे क्या लिखूँ मैं इस ज़माने में वो मुझको जाँ से बढ़कर है ,मैं उसको जाँ से बढ़कर हूँ محبّت اسکے آگے کیا لکھوں میں اس زمانے میں وہ مجھکو جاں سے بڑھکر ہے ، میں اسکو جاں سے بڑھکر ہوں ― नज़र نذر

फ़ज़ीलत

याद रखती है ये दुनिया दर्द-ए-दिल की दास्ताँ तुम फ़क़त अपनी सियाही में फ़ज़ीलत भर रहे یاد رکھتی ہے یہ دنیا دردے دل کی داستاں تم فقط اپنی سیاہی میں فضیلت بھر رہے — नज़र نذر फ़क़त - Only फ़ज़ीलत - Knowledge, Excellence

सितम

सितम बरपा रही है ज़िन्दगी और मैं मेरे ऊपर न जाने कौन आएगा बचाने मुझको ऐसे में ستم برپا رہی ہے زندگی اور میں میرے اوپر ن جانے کون آئیگا بچانے مجھکو ایسے میں ― नज़र نذر

मोमबत्ती

मेरे क़तरों से गर कोई बनेगी मोमबत्ती जो हमेशा ही वो तेरे नाम की शम्मे जलायेगी میرے قطروں سے گر کوئ بنیگی مومبتی جو ہمیشہ ہی وہ تیرے نام کی شمّے جلائےگی — नज़र نذر क़तरों - Drops शम्मे - Flame

रौशनी

Image
बुराई ख़ौफ़ में होगी यक़ीनन अलग ही रंग में है रौशनी आज برای خوف میں ہوگی یقیناً الگ ہی رنگ میں ہے روشنی آج — नज़र نذر #Deepawali

औक़ात

अपनी औक़ात से ज़्यादा तुम्हें चाहा मैंने मेरी औक़ात तो बस ख़ुद को भुलाने तक थी اپنی اوقات سے زیادہ تمھیں چاہا مینے میری اوقات تو بس خد کو بھلانے تک تھی — नज़र نذر #एक_ख़याल

गुज़ारिश

मेरी गुज़ारिश थी कि तुमसे गुफ़्तगू हो रात भर मेरी गुज़ारिश पर कोई और ही ले के जाता रहा میری گزارش تھی کِ تمسے گفتگو ہو رات بھر میری گزارش پر کوئی اور ہی لے کے جاتا رہا — नज़र نذر

रंग

क्या पता ये रंग तेरा किस तरह मुझपे चढ़ा मेरे हर शय में फ़क़त इक तू ही मुझको दिख रहा کیا پتا یہ رنگ تیرا کس طرح مجھپے چڑھا میرے ہر شے میں فقط اک تو ہی مجھکو دکھ رہا — नज़र نذر शय - Thing , Part फ़क़त - Only

कश्ती

मैंने अक्सर हर हमेशा कश्ती अपनी तब बढ़ाई आसमाँ ने जब हवाओं की जगह तूफ़ान रक्खा مینے اکثر ہر ہمیشہ کشتی اپنی طب بڑھائی آسماں نے جب ہواؤں کی جگہ طوفان رکّھا — नज़र نذر

तेरी तस्वीर

Image
अँधेरी रात में टूटी हुई इक नींद से डर के तेरी तस्वीर से लिपटा हुआ बैठा हूँ मैं कब से اندھیری رات میں ٹوٹی ہوئی اک نیند سے ڈر کے تیری تصویر سے لپٹا ہوا بیٹھا ہوں میں کب سے ― नज़र نذر

असरार

उस राख़ में लेकिन अजब असरार हैं है ख़ाक फिर भी लोग उससे जल रहें اس راخ بھی لیکن عجب اسرار ہیں ہے خاک پھر بھی لوگ اُسّے جل رہیں — नज़र نذر असरार - Secrets

बंदिश

हर्फ़ जाने कितने लिख लिख के मिटाये होंगे उसने पर अना और ख़ुद की बंदिश में यक़ीनन क़ैद होगी حرف جانے کتنے لکھ لکھ کے مٹائے ہونگے اُسنے پر انا اور خد کی بندش میں یقیناً قيد ہوگی — नज़र  نذر हर्फ़ - Letter or Word अना - Ego