सफ़र ए मोहब्बत
मोहब्बत गुज़रती है तोहमत से होके , गुज़रती है फिर वो ही रहमत से होके , इनायत से होके ,अक़ीदत से होके , झिझक से भी होके ,हया से भी होके , मोहब्बत मगर है हया से भी आगे , शरारत से होके ,शिकायत के आगे , है जन्नत से होके , वो जिल्लत के आगे , मगर है उतरना यहाँ नागवारा , जो उतरे कोई तो दग़ाबाज़ है वो , मगर ये है आलम ,यहाँ लोग अक्सर , बता के मोहब्बत ,उतरते हैं जन्नत , मगर कुछ दिवानों ने देखी है जिल्लत , बढ़े भी हैं आगे वो वहशत से होके , इबादत से आगे सदाक़त से होके , नदामत से आगे , हाँ , नफ़रत से होके , मलामत से आगे , अज़ीयत से होके , ये पाने ओ खोने की हसरत के आगे , जो बुझने न पाये ,शमा वो जला के , बढ़ोगे अगर तुम मसाफ़त में आगे , गरज़ सब भुला के जो चाहत के आगे , क़ज़ा की रियासत से कुछ मील पहले , दिखेगी तुम्हे फिर जो तख़्ती सुकूूँ की , तुम उतरो न उतरो ,वही है मोहब्बत , मोहब्बत की गाड़ी वहीं पे रुकेगी । — नज़र तोहमत - False Allegation , झूठा आरोप इनायत - Kindness अक़ीदत - Faith , Affection , Attachment हया - shame , शर्म नागवारा - Not acceptable ...