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एहसास

तुमसे मिलने के हसीं एहसास के दिन ढलने को हैं तुमसे मिलने की ख़ुशी के आड़ में इक ग़म अजब है تمسے ملنے کے حسیں احساس کے دن ڈھلنے کو ہیں تمسے ملنے کی خوشی کے آڑ میں اِک غم عجب ہے  — नज़र نظر

सफ़ल हैं ज़िन्दगी में आप (नज़्म)

मैं जानता हूँ ज़िंदगी में आगे बढ़ते रहना इक ज़रूरी अम्ल है  मैं जानता नहीं फ़क़त, मैं मानता भी हूँ कि ज़िंदगी में आगे बढ़ते रहना चाहिए मगर मैं फिर से कहता हूँ , ये आगे बढ़ते रहना है ज़रूरी ज़हन-ओ-सोच का  ज़मीर का ,नज़रिए का  नज़रिया एक ये भी है कि क़ैद कर परिन्दे को वो सब दो जिसके वास्ते वो जी रहा  मगर फिर ऐसा क्यूँ है वो, तुम्हारे पिंजरा खोलते ही तुमको छोड़ जाता है  नज़रिया एक ये भी है कि रोज़ इक परिन्दे को दिया करो ख़ुराक-ओ-प्यार  अजब नहीं वो तुमसे दूर जाने के बजाए पास आएगा  यही तो है ना सोच का,विचार का,नज़रिए और ज़हन का सहीह मायने में आगे बढ़ना फिर  नज़रिया एक ये भी है कि धर्म इक तुम्हारा ही सहीह और सच है बस  कोई भी ग़ैर धर्म है मज़ाक-ओ-झूठ सा तुम्हारे वास्ते  नज़रिया एक ये भी है कि जाति-धर्म कुछ नहीं  हर एक फ़र्द की वही बनावट और चाल है  बनाने वाले ने तो एक फ़र्क़ तक किया नहीं  तो तुमने जाति-धर्म का मुखौटा क्यूँ लगा लिया अना ये कैसी है,तुम्हारी धारणा ही सच है बस  अना ये कैसी है कि हम अलग-अलग पर एक हैं  नज़रिया एक ये भी है पुरानी मान्यताओं...

नहीं (ग़ज़ल)

तू उसे इसलिए बस भूला नहीं दूसरा कोई मयस्सर था नहीं تو اُسے اسلئے بس بھولا نھیں دوسرا کوئی میسّر تھا نہیں जाने क्या नाम था उस शहर का दोस्त सिवा इक शक्ल के कुछ देखा नहीं جانے کیا نام تھا اُس شہر کا دوست سوا اک شکل کے کچھ دیکھا نہیں कुछ अजब लोग बता के सभी को कहते हैं फिर किसी से कहना नहीं کچھ عجب لوگ بتا کے سبھی کو کہتے ہیں پھر کسی سے کہنا نہیں उसमें ज़िन्दा है मुसलसल तो क्या वास्ते तेरे वो गर ज़िन्दा नहीं اُسمیں زندہ ہے مسلسل تو کیا واسطے تیرے وہ گر زندہ نہیں चर्चा-ए-शहर था बेटे का अमल रस्म-ए-गिर्या में भी वो रोया नहीं چرچاِ شہر تھا بیٹے کا عمل رسمِ گِرْیہ میں بھی وہ رویا نہیں उससे बढ़कर नहीं नफ़रत किसी से उससे बढ़कर कभी कोई था नहीं اُسّے بڑھکر نہیں نفرت کسی سے اُسّے بڑھکر کبھی کوئی تھا نہیں चाँद हासिल किया है जुगनू फिर कौन कहता है मेरे बस का नहीं چاند حاصل کیا ہے جُگنو پھر کوں کہتا ہے مِرے بس کا نہیں मौत बस एक बहाना है 'नज़र' लोग मिट जाते हैं या तो या नहीं موت بس ایک بہانہ ہے 'نظر' لوگ مٹ جاتے ہیں یا تو یا نہیں — नज़र نظر मयस्सर - Available मुसलसल - Continuously अमल - Act गिर्...

जानवर ( नज़्म )

'जानवर' ( नज़्म ) बहुत अजीब दुनिया है हमारी भी यहाँ पे कुत्ते-बिल्लियों का है सलौन यहाँ पे ए.सी. गाड़ियों में घूमते हैं जानवर झुलस-ठिठुर के फ़र्द मर गए पर इंसाँ के यहाँ यहाँ पे थालियों में जूठा छोड़ते हैं जानवर बिलक रहे हैं बच्चे भूक से पर इंसाँ के यहाँ हर एक जानवर को है पता इलाज भूक का वो जानवर हैं और हम इक इंसाँ हैं हमें ये क्यूँ समझ नहीं, हमें ये दिखता क्यूँ नहीं हमारे भूक का इलाज जानवर से है अलग वो जानवर हैं कच्चा-पक्का कुछ भी खा के जीएँ'गे हमें मगर ये सोचना है इंसाँ कैसे जीएँ'गे भला करो,मगर ये याद रक्खो हम हैं इंसाँ ज़ात हमारा फ़र्ज़ बनता है हमारी ज़ात के लिए मगर हमें है फ़िक्र ज़ात और की वो ज़ात जिनको हमसे है लगाव रोटी के लिए वो ज़ात जिसको फ़र्क़ ही नहीं कि शख़्स कौन है खिलाये जो वो प्यार है,बजाए अक्स कौन है किसी भी जानवर को प्यार इतना ही करो 'नज़र' कि बच्चा कोई इंसाँ का ये आरज़ू करे नहीं मैं जानवर ही होता काश!  मैं जानवर ही होता काश!! — नज़र ' جانور ' ( نظم ) بہت عجیب دنیا ہے ہماری بھی یہاں پہ کُتّے بلیوں کا ہے سلوں یہاں پے اے۔ سی ۔ گاڑیوں میں گھومتے ہیں جانور جھ...

काश वो दौर फिर से आ जाए' ( नज़्म )

'काश वो दौर फिर से आ जाए' ( नज़्म ) नौकरी मिल सके कोई अच्छी एक अरसे तलक पढ़ाई की इम्तिहाँ-इम्तिहाँ थी ज़िंदगी बस इसके आगे न हमको कोई ख़बर सिवा इसके न कुछ भी सोचा कभी सिवा इसके न कुछ किया ही कभी शौक़ इस सिलसिले में मर रहे थे यानी जीने में कुछ मज़ा नहीं था सालहा-साल बस मशक़्क़त की सालहा-साल बस यूँ ही गुज़रे एक छोटे से कमरे में हमने एक सूरज को ख़ाक कर डाला एक दुनिया सवार सकता था जो अपनी ग़फ़लत से सब बदल डाला जिस्म जो इक मिसाल होती थी आज कर डाला है धुआँ हमने इक हिमालय को रफ़्ता-रफ़्ता 'नज़र' गोया कर डाला है कुआँ हमने कुछ अलग कर भी लेते शायद हम कुछ नया लिख भी देते शायद हम हर घड़ी पर वही मलाल-ओ-ख़याल काश वो तौर फिर से आ जाए काश वो दौर फिर से आ जाए अपनी गलियों के शाहज़ादे थे हम  चश्म-ओ-पेशानी पर चमक थी अलग कोई खाता था रश्क हमसे और कोई कहता था ध्रुव तारा हमें आज सब कुछ मगर अलग है बहुत आज डरते हैं उस गली से हम जिस मक़ाम और छवि पर चढ़कर कल आसमाँ तक को जगमगाते हम आज बीते हुए मक़ाम को मेज़ और माज़ी के छवि को रस्सी बना हमने लटका दिया है ख़ुद को वहीं वहीं जिन गलियों के सितारे थे हम वहीं जिनके कि शाहज़ा...

मंजिल समझ

ऐसे-ऐसे लोग मुझसे आगे हैं आज जो मुझे मंज़िल समझ कर बढ़ चले थे ایسے ایسے لوگ مُجھسے آگے ہیں آج جو مجھے منزل سمجھ کر بڑھ چلے تھے — नज़र نظر

मौत के बाद

चार लोगों की न क्यूँ परवा करें हम मौत के बाद आख़िर उनको ही तो तय करनी है पकवानों की फ़ेहरिस्त چار لوگوں کی نہ کیوں پروا کریں ہم موت کے بعد آخر انکو ہی تو تے کرنی ہے پکوانوں کی فہرست — नज़र نظر फ़ेहरिस्त - List

ख़ाब

वो ख़ाब क्या जो पूरा हो जाए ' नज़र ' वो क्या नशा जो मौत तक रहने न पाए 'وہ خان کیا جو پورا ہو جائے ' نظر وہ کیا نشا جو موت تک رہنے نہ پائے — नज़र نظر