नहीं (ग़ज़ल)
तू उसे इसलिए बस भूला नहीं
दूसरा कोई मयस्सर था नहीं
تو اُسے اسلئے بس بھولا نھیں
دوسرا کوئی میسّر تھا نہیں
जाने क्या नाम था उस शहर का दोस्त
सिवा इक शक्ल के कुछ देखा नहीं
جانے کیا نام تھا اُس شہر کا دوست
سوا اک شکل کے کچھ دیکھا نہیں
कुछ अजब लोग बता के सभी को
कहते हैं फिर किसी से कहना नहीं
کچھ عجب لوگ بتا کے سبھی کو
کہتے ہیں پھر کسی سے کہنا نہیں
उसमें ज़िन्दा है मुसलसल तो क्या
वास्ते तेरे वो गर ज़िन्दा नहीं
اُسمیں زندہ ہے مسلسل تو کیا
واسطے تیرے وہ گر زندہ نہیں
चर्चा-ए-शहर था बेटे का अमल
रस्म-ए-गिर्या में भी वो रोया नहीं
چرچاِ شہر تھا بیٹے کا عمل
رسمِ گِرْیہ میں بھی وہ رویا نہیں
उससे बढ़कर नहीं नफ़रत किसी से
उससे बढ़कर कभी कोई था नहीं
اُسّے بڑھکر نہیں نفرت کسی سے
اُسّے بڑھکر کبھی کوئی تھا نہیں
चाँद हासिल किया है जुगनू फिर
कौन कहता है मेरे बस का नहीं
چاند حاصل کیا ہے جُگنو پھر
کوں کہتا ہے مِرے بس کا نہیں
मौत बस एक बहाना है 'नज़र'
लोग मिट जाते हैं या तो या नहीं
موت بس ایک بہانہ ہے 'نظر'
لوگ مٹ جاتے ہیں یا تو یا نہیں
— नज़र نظر
मयस्सर - Available
मुसलसल - Continuously
अमल - Act
गिर्या - Weeping
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