मसरूफ़

मसरूफ़ कितना भी हूँ , तुझे इक झलक देख लेता हूँ मैं ,
तेरी  हसी  में  छिपी  तिरी  भीगी  पलक  देख  लेता  हूँ मैं ।

— नज़र


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