गवाया है ( ग़ज़ल )
हज़ारों पल,पहर उसने फ़क़त जिसको गवाया है
वो अबकी फिर से उस तक चंद सिक्के ले के आया है
ہزاروں پل ، پھر اُسنے فقط جسکو گوایا ہے
وہ انکی پھر سے اس تک چند سکّے لے کے آیا ہے
वो क्या तस्वीर थी और उसने उसको क्या दिखाया है
यूँ ही हर शय को रब जाने 'नज़र' क्या क्या बताया है
وہ کیا تصویر تھی اور اُسنے اسکو کیا دکھایا ہے
یوں ہی ہر سے کو رب جانے ' نذر ' کیا کیا بتایا ہے
तुम्हारे जिस्म की तामीर हीरों से हुई होगी
तुम्हारे दिल को लेकिन ख़ाक से उसने बनाया है
تمہارے جسم کی تعمیر ہیروں سے ہوئی ہوگی
تمہارے دل کو لیکن خاک سے اُسنے بنایا ہے
मेरी सब उम्र गुज़री जिस दिए की लौ जलाने में
जली कुछ यूँ कि मैंने अश्कों से उसको बुझाया है
میری سب عمر گزری جس دیے کی کو جلانے میں
جلی کچھ یوں کہ مینے اشکوں سے اسکو بجھایا ہے
समा ये मयकदा मुझको ,मुझे ये चाँद तारे मय
ग़म ए जानाँ है सो बाक़ी सभी मय याँ पे ज़ाया है
سما یہ میکدہ مجھکو ، مجھے یہ چاند تارے مے
غم ے جاناں ہے سو باقی سبھی مے مجھکو ضائع ہے
अजबतर मोमबत्ती है , अजब कुछ बात है इसमें
मेरे ग़म और मोहब्बत ने इसे बाहम जलाया है
اجبتر مومبتی ہے ، عجب کچھ بات ہے اسمے
میرے غم اور محبّت نے اسے باہم جلایا ہے
है तुमसे किस तलक नफ़रत ,तुम्हें बतला नहीं सकता
बड़ी मुश्किल से मैंने तुमको सीने से लगाया है
ہے تمسے کس تلک نفرت ، تمھیں بتلا نہیں سکتا
بڑی مشکل سے مینے تمکو سینے سے لگایا ہے
तुम्हारी याद ने पैहम किया है हाल यूँ मेरा
न तो पैहम रुलाया है न ही पैहम हँसाया है
تمہاری یاد نے پیہم کیا ہے حال یوں میرا
ن تو پیہم رُلایا ہے ن ہی پیہم ہنسایا ہے
मेरे सब ज़ख़्म धो डालें , बनी आँखों की मरहम वो
वो कैसे अजनबी जिसने मुझे ऐसे सुलाया है
میرے سب زخم دھو ڈالیں ، بنی آنکھوں کی مرہم وہ
وہ کیسے اجنبی جسنے مجھے ایسے سلایا ہے
'नज़र' फिर ग़र्ज़ को अपने न देखा मेरे ज़ख़्मों को
भला वो अपने कैसे जिसने मुझको बस रुलाया है
'نذر' پھر غرض کو اپنے ن دیکھا میرے زخموں کو
بھلا وہ اپنے کیسے جسنے مجھکو بس رلایا ہے
― नज़र نذر
फ़क़त - Only , सिर्फ
शय - Thing , चीज़
तामीर - Construction
समा - Sky
मय-कदा - Tavern
अजबतर - Strange , आश्चर्यजनक
बाहम - Together
पैहम - Continuously
वो अबकी फिर से उस तक चंद सिक्के ले के आया है
ہزاروں پل ، پھر اُسنے فقط جسکو گوایا ہے
وہ انکی پھر سے اس تک چند سکّے لے کے آیا ہے
वो क्या तस्वीर थी और उसने उसको क्या दिखाया है
यूँ ही हर शय को रब जाने 'नज़र' क्या क्या बताया है
وہ کیا تصویر تھی اور اُسنے اسکو کیا دکھایا ہے
یوں ہی ہر سے کو رب جانے ' نذر ' کیا کیا بتایا ہے
तुम्हारे जिस्म की तामीर हीरों से हुई होगी
तुम्हारे दिल को लेकिन ख़ाक से उसने बनाया है
تمہارے جسم کی تعمیر ہیروں سے ہوئی ہوگی
تمہارے دل کو لیکن خاک سے اُسنے بنایا ہے
मेरी सब उम्र गुज़री जिस दिए की लौ जलाने में
जली कुछ यूँ कि मैंने अश्कों से उसको बुझाया है
میری سب عمر گزری جس دیے کی کو جلانے میں
جلی کچھ یوں کہ مینے اشکوں سے اسکو بجھایا ہے
समा ये मयकदा मुझको ,मुझे ये चाँद तारे मय
ग़म ए जानाँ है सो बाक़ी सभी मय याँ पे ज़ाया है
سما یہ میکدہ مجھکو ، مجھے یہ چاند تارے مے
غم ے جاناں ہے سو باقی سبھی مے مجھکو ضائع ہے
अजबतर मोमबत्ती है , अजब कुछ बात है इसमें
मेरे ग़म और मोहब्बत ने इसे बाहम जलाया है
اجبتر مومبتی ہے ، عجب کچھ بات ہے اسمے
میرے غم اور محبّت نے اسے باہم جلایا ہے
है तुमसे किस तलक नफ़रत ,तुम्हें बतला नहीं सकता
बड़ी मुश्किल से मैंने तुमको सीने से लगाया है
ہے تمسے کس تلک نفرت ، تمھیں بتلا نہیں سکتا
بڑی مشکل سے مینے تمکو سینے سے لگایا ہے
तुम्हारी याद ने पैहम किया है हाल यूँ मेरा
न तो पैहम रुलाया है न ही पैहम हँसाया है
تمہاری یاد نے پیہم کیا ہے حال یوں میرا
ن تو پیہم رُلایا ہے ن ہی پیہم ہنسایا ہے
मेरे सब ज़ख़्म धो डालें , बनी आँखों की मरहम वो
वो कैसे अजनबी जिसने मुझे ऐसे सुलाया है
میرے سب زخم دھو ڈالیں ، بنی آنکھوں کی مرہم وہ
وہ کیسے اجنبی جسنے مجھے ایسے سلایا ہے
'नज़र' फिर ग़र्ज़ को अपने न देखा मेरे ज़ख़्मों को
भला वो अपने कैसे जिसने मुझको बस रुलाया है
'نذر' پھر غرض کو اپنے ن دیکھا میرے زخموں کو
بھلا وہ اپنے کیسے جسنے مجھکو بس رلایا ہے
― नज़र نذر
फ़क़त - Only , सिर्फ
शय - Thing , चीज़
तामीर - Construction
समा - Sky
मय-कदा - Tavern
अजबतर - Strange , आश्चर्यजनक
बाहम - Together
पैहम - Continuously
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