चराग़ ए नज़र
चराग़ - ए - नज़र को शमा - ए - तबस्सुम गवारा नही है , सो तुम भी गर आओ शमा - ए -अज़ीयत ही लेकर के आना । — नज़र शमा ए तबस्सुम - Flame of Smile गवारा - Acceptable , Tolerable शमा ए अज़ीयत - Flame of Pain or torture
By Kunal Rajput (नज़र نظر)