चराग़ ए नज़र

चराग़ - ए - नज़र  को  शमा - ए - तबस्सुम  गवारा  नही  है ,
सो तुम भी गर आओ शमा - ए -अज़ीयत ही लेकर के आना ।

— नज़र

शमा ए तबस्सुम - Flame of Smile
गवारा - Acceptable , Tolerable
शमा ए अज़ीयत - Flame of Pain or torture



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