ढूँढ़ती है
वो ग़ैरों सी बातें , वो पर्दों में रातें वो मुझमे वो ही अजनबी ढूँढ़ती है जबीं पे शिकन और लफ्ज़ों पे पहरे वो शक्ल-ए-मरासिम वो दी ढूँढ़ती है — नज़र जबीं - Forehead शक्ल-ए-मरासिम - Form of relation दी - Yesterday
By Kunal Rajput (नज़र نظر)