Posts

Showing posts with the label dilemma

कश्मकश

 अजब कशमकश में फँसा है मुसाफ़िर गँवाना है पैरों को बढ़ने की ख़ातिर عجب کشمکش میں پھنسا ہے مسافر گنوانا ہے پیروں کو بڑھنے کی خاطر अजब मरहले पर मेरी ज़िन्दगी है मुझे ज़हर पीना है जीने की ख़ातिर عجب مرحلے پر میری زندگی ہے مجھے زہر پینا ہے جینے کی خاطر ― नज़र نظر मरहले - Stage

एक वजह ये भी

Image
उसके हाल एक जैसे ही थे ,जैसे वो घर से बाहर था ,ठीक वैसे ही हाल उसके घर पे भी थे । मुसलसल  सपने देखा करता था,वहाँ भी और यहाँ भी, मुख़्तसर सी कोशिशें करता था ,वहाँ भी और यहाँ भी। हालांकि,जब वो बाहर था और उसने घर आकर पढ़ाई करने का मन बना लिया था,तब उसके इरादे कुछ और ही थे ,या यूँ कहूं आसमानो पर थे। अपने दोस्तों से जुदा होने के अलावा और कोइ वजह उस वक़्त उसके ज़ेहन ओ दिल मे नही थे ,जो उसके घर पर जा के पढ़ाई करने के पक्ष में ना हो। वो अक्सर अपने दोस्तों को दलीलें दिया करता था और साथ ही में ख़ुद को भी , कि उसके घर जाने का फ़ैसला सही है , वो उनसे अक्सर कहा करता था और शायद ख़ुद से भी ,वहाँ खाने-पीने की कोइ परेशानी नही होगी , ना ही और भी ऐसे-वैसे घर के काम जो फ़िज़ूल में यहाँ हमे करना होता है ,वो तमाम वक़्त भी मैं पढ़ाई में दे पाऊंगा ,और तो और अगर कभी किसी ऐसे-वैसे वजह के कारण पढ़ाई में कोताही बरतुंगा तो माँ-बाबा को देख आत्मग्लानि का एहसास होगा तो ख़ुद फिर से पढ़ाई शुरू कर दूंगा ,और वैसे भी जब मेरी कोचिंग ख़त्म हो चुकी है तो फिर यहाँ रहूँ या घर पर ,क्या फर्क पड़ता है ,ऊपर से घर पर इतने सारे सकारात्मक...