ढूँढ़ने की सभी कोशिश यूँ ही ज़ाया हो गयी , जो हँसी थी दरमियाँ में वो कहीं पे खो गयी । ― नज़र मेरी सारी कोशिशें भी यूँ ही ज़ाया हो गयी , जो हँसी थी दरमियाँ में वो कहीं पे खो गयी । ― नज़र
हँसी कोई मुकम्मल अब लबों पे ही नहीं आती ये दौलतमंद भी मुफ़्लिस दुकानों पे कहाँ जातें ہنسی کوئ مکمّل اب لبوں پے ہی نہیں آتی یہ دولتمند بھ مفلس دکانوں پے کہاں جاتیں — नज़र نذر मुफ़्लिस - Poor, Bankrupt