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रह-गुज़र

मसनद पे जो बैठें हैं उनसे कुछ नहीं उम्मीद अब ऐ रह-गुज़र तू ही सिमट के मुख़्तसर हो जा ज़रा مسند پے جو بیٹھیں ہیں انسے کچھ نہیں اُمّید اب اے رہگزر تو ہی سمٹ کے مختصر ہو جا ذرا — नज़र نظر मसनद - Seat of Honour मुख़्तसर - Concise रह-गुज़र - Pathway 

अँधेरे की लौ

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फिर अँधेरे की मुकम्मल लौ जलेगी देखना , फिर चराग़ों  के तले  होंगे सियासी  देखना । ― नज़र सियासी - Politicians

इत्तिला

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चराग़ों पे देखो फ़िदा तुम न होना , है आलम सियासी तो शम्मे जलेंगे । ― नज़र सियासी - Political शम्मा - Light ,Flame

शहर (ग़ज़ल)

शहर  में  धुआँ   है   धुएँ  में  शहर  है , सियायत की देखो  अजब ये लहर है ।‌ हैं  ग़ाफ़िल बशिन्दे  न कोई  ख़बर  है , लुटेरों के वश में  ही  होने को घर है । ये  क़ब्रें  खुलीं  भी ओ  लाशें  उठीं भी , गुनहगार  फिर भी  यहाँ  बे-फ़िकर  है । ज़हर  है  यहाँ  भी  ज़हर  है  वहाँ  भी  , मैं  कैसे  बताऊँ  कहाँ  कम  ज़हर  है । न ज़द में  सितारे न चाहत क़मर की , मैं  कैसे बताऊँ ये  कैसा  सफ़र  है । है  रौशन  शमा गर  तो कैसा  अँधेरा , अंधेरों  का  डर है  तो  कैसी  सहर है । कोई  आईना हो  तो समझे वो  हमको , मुझे रौशनी खल रही किस क़दर है । न हालत ही सुधरी न  बदली फ़ज़ा ये , बताओ तुम्हीं फिर ये कैसा असर है । समंदर  से  हमको  शिकायत  नही  है , 'नज़र'  हमको  तेज़  हवाओं से...