फ़रेबी लफ्ज़
ज़ुबाँ पे लफ्ज़ फरेबों से 'नज़र' मैं ला नहीं सकता , भले महफ़िल हो दिवानी मगर सुना नहीं सकता , किसी दिल-पाक कागज़ पे कदूरत आ नहीं सकता , असल शायर फ़रेबी लफ्ज़ गले लगा नहीं सकता , दीवाने लाख लिक्खें हो कदूरत से मगर फिर भी , फ़रेबी लफ्ज़ शायरों के कलम पे आ नहीं सकता । ― नज़र दिवानी - Mad दिल-पाक - Sacred/pure heart कदूरत - मैल दीवान - Collection of ghazals