रात भर
मैं घिसता रहूँगा कलम रात भर , मगर ना घटेंगे ये ग़म रात भर , न दर्द ए हलक़ ना कपसते बदन , न होगी बे-चैनी ही कम रात भर । — नज़र दर्द ए हलक़ - Painful throat कपसना - Breathing and shivering while silent cry
By Kunal Rajput (नज़र نظر)