रात भर Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps March 25, 2019 मैं घिसता रहूँगा कलम रात भर , मगर ना घटेंगे ये ग़म रात भर , न दर्द ए हलक़ ना कपसते बदन , न होगी बे-चैनी ही कम रात भर । — नज़र दर्द ए हलक़ - Painful throat कपसना - Breathing and shivering while silent cry Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
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