नया साल
फ़ज़ाओं ने अपनी मिज़ाजें बदल लीं ?
सलीक़ा हवाओं ने बहने का बदला ?
रवैया अंधेरों ने आने का बदला ?
या तब्दीलियाँ आ गईं हैं सहर में ?
क़मर ने ज़मी को इशारे दिए कुछ ?
सितारे ज़ियादा चमकने लगें क्या ?
धनक ने निकलकर बताया नया कुछ ?
या सूरज के रंगत में आया फ़रक कुछ ?
न बदली फ़ज़ा ये न बदला ये मौसम ,
हाँ ,बदला है कुछ तो ये धरती का आलम ,
बदलने की फिर ख़ुद को ठाना है सबने,
नए साल के फिर नए इस भरम में ,
हाँ ,तारीख़ों ने पैरहन अपने बदलें ,
अँधेरे नशे में भी हैं कुछ ज़ियादा ,
ज़रा सी हवाएँ भी ज़ख़्मी हुई है ,
तो कसमे ओ वादे भी मसरूफ़ होंगे ,
मगर ये जो हैं सब महज़ हैं सियापे ,
हम इंसान तारीख़ों के कब थें मोहताज़,
बदलना है गर तो अभी ख़ुद को बदलो ,
मगर ये 'अभी' ज़ेहन में है हमारे ।
― नज़र
सहर - Morning
क़मर - Moon
धनक - Rainbow
पैरहन - Dress
मसरूफ़ - Busy
#NewYear2019
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