में मेरे (ग़ज़ल)
जो होती नही है तू बातों में मेरे ,
असल में तू होती है साँसों में मेरे ।
तुम्हारी कदर हम बताये तो कैसे ,
जो रूठो तो आओ न रातों में मेरे ।
मैं फैला के बाहें खड़ा था खुशी से ,
कि दौड़ी तुम आओगी बाहों में मेरे ।
खड़ा था मैं वैसे ही घंटों वहाँ पर ,
मगर तुम न आयी थी राहों में मेरे ।
तेरी राह तकता रहा पागलों सा ,
फ़क़त तुम थी शामिल ख़यालों में मेरे ।
जब अगले सहर मैंने खोली थी आँखें ,
कुछ अश्कें सजी थीं बस आँखों में मेरे ।
मैं बैठा हूँ शब भर दिवारों से लग कर ,
मैं क्या क्या बताऊँ अशआरों में मेरे ।
मोहब्बत 'नज़र' क्या,है शक्ल ए ख़ुदाई ,
ख़ुदा सी है वो भी अज़ानों में मेरे ।
― नज़र
फ़क़त - only , सिर्फ
सहर - Morning
अश्क - Tears
शब - Night
शक्ल ए ख़ुदाई - Form of Divinity
असल में तू होती है साँसों में मेरे ।
तुम्हारी कदर हम बताये तो कैसे ,
जो रूठो तो आओ न रातों में मेरे ।
मैं फैला के बाहें खड़ा था खुशी से ,
कि दौड़ी तुम आओगी बाहों में मेरे ।
खड़ा था मैं वैसे ही घंटों वहाँ पर ,
मगर तुम न आयी थी राहों में मेरे ।
तेरी राह तकता रहा पागलों सा ,
फ़क़त तुम थी शामिल ख़यालों में मेरे ।
जब अगले सहर मैंने खोली थी आँखें ,
कुछ अश्कें सजी थीं बस आँखों में मेरे ।
मैं बैठा हूँ शब भर दिवारों से लग कर ,
मैं क्या क्या बताऊँ अशआरों में मेरे ।
मोहब्बत 'नज़र' क्या,है शक्ल ए ख़ुदाई ,
ख़ुदा सी है वो भी अज़ानों में मेरे ।
― नज़र
फ़क़त - only , सिर्फ
सहर - Morning
अश्क - Tears
शब - Night
शक्ल ए ख़ुदाई - Form of Divinity
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