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शहर-ए-मोहब्बत

 ग़म की हमें आदत है आप अपनी कहें शहर-ए-मोहब्बत में गुज़र कर लेंगी आप غم کی ہمیں عادت ہے آپ اپنی کہیں شہرِ محبت میں گزر کر لینگی آپ ― नज़र نظر

इश्क़

 चलो माना कि तुम्हें इश्क़ ही था उससे पर तुम भला इतने भले-चंगे हो तो हो कैसे چلو مانا کِ تمہیں عشق ہی تھا اس سے پر تم بھلا اتنے بھلے چنگے ہو تو ہو کیسے — नज़र نظر 

मोहब्बत

मोहब्बत इसके आगे क्या लिखूँ मैं इस ज़माने में वो मुझको जाँ से बढ़कर है ,मैं उसको जाँ से बढ़कर हूँ محبّت اسکے آگے کیا لکھوں میں اس زمانے میں وہ مجھکو جاں سے بڑھکر ہے ، میں اسکو جاں سے بڑھکر ہوں ― नज़र نذر

औक़ात

अपनी औक़ात से ज़्यादा तुम्हें चाहा मैंने मेरी औक़ात तो बस ख़ुद को भुलाने तक थी اپنی اوقات سے زیادہ تمھیں چاہا مینے میری اوقات تو بس خد کو بھلانے تک تھی — नज़र نذر #एक_ख़याल

मोहब्बत है मेरी

वो  इबारत , वो  इबादत , वो  अक़ीदत है मेरी दुनिया वालों खुल के सुन लो वो मोहब्बत है मेरी وو  عبارت  وو  عبادت  وو  عقیدت  ہے  میری دنیا والوں کھل کے سن لو وو محبت ہے میری — नज़र इबारत - Writing , Composition अक़ीदत - Faith

कह नहीं पाती

उसे कितनी मोहब्बत है वो मुझसे कह नहीं पाती मगर मालूम है मुझको मैं उसको जाँ से बढ़कर हूँ اسے  کتنی   محبّت  ہے   وو  مجھسے   که  نہیں  پاتی مگر  مالوم ہے مجھکو میں اسکو جاں سے  بڑھکر  ہوں — नज़र

मोहब्बत

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मोहब्बत और पुख़्ता हो गई है या न जाने क्या मैं तुमसे अब बिछड़ने की भी बातें सोच लेता हूँ — नज़र

एक तरफ़ा

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एक  तरफ़ा  नाम की  कोई  मोहब्बत  ही नहीं , झूठे  हैं सब  या हैं  धोखे में  ख़ुदी के  वो सभी । माँ  भी  बच्चों में  सहारा  ढूँढ़ती है  और फिर , बे-वज़ह तो लोग सजदा तक नहीं करते हैं जी । ―  नज़र

मोहब्बत

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है  ख़ाहिश हमारी बुरी हो  या अच्छी , हमीं सा  मोहब्बत  तुम हमसे  करलो । ― नज़र

सफ़र ए मोहब्बत

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मोहब्बत गुज़रती है तोहमत से होके , गुज़रती है फिर वो ही रहमत से होके , इनायत से होके ,अक़ीदत से होके , झिझक से भी होके ,हया से भी होके , मोहब्बत मगर है हया से भी आगे , शरारत से होके ,शिकायत के आगे , है जन्नत से होके , वो जिल्लत के आगे , मगर है उतरना यहाँ नागवारा , जो उतरे कोई तो दग़ाबाज़ है वो , मगर ये है आलम ,यहाँ लोग अक्सर , बता के मोहब्बत ,उतरते हैं जन्नत , मगर कुछ दिवानों ने देखी है जिल्लत , बढ़े भी हैं आगे वो वहशत से होके , इबादत से आगे सदाक़त से होके , नदामत से आगे , हाँ , नफ़रत से होके , मलामत से आगे , अज़ीयत से होके , ये पाने ओ खोने की हसरत के आगे , जो बुझने न पाये ,शमा वो जला के , बढ़ोगे अगर तुम मसाफ़त में आगे , गरज़ सब भुला के जो चाहत के आगे , क़ज़ा की रियासत से कुछ मील पहले , दिखेगी तुम्हे फिर जो तख़्ती सुकूूँ की , तुम उतरो न उतरो ,वही है मोहब्बत , मोहब्बत की गाड़ी वहीं पे रुकेगी । — नज़र तोहमत - False Allegation , झूठा आरोप इनायत - Kindness अक़ीदत - Faith , Affection , Attachment हया - shame , शर्म नागवारा - Not acceptable ...