एक तरफ़ा

एक  तरफ़ा  नाम की  कोई  मोहब्बत  ही नहीं ,
झूठे  हैं सब  या हैं  धोखे में  ख़ुदी के  वो सभी ।

माँ  भी  बच्चों में  सहारा  ढूँढ़ती है  और फिर ,
बे-वज़ह तो लोग सजदा तक नहीं करते हैं जी ।

―  नज़र



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