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सखी

 तू नहीं आएगा यक़ीन दिला मैं बड़े इंतिशार में हूँ सखी शमअ तो कब की बुझ चुकी है मगर मैं तेरे इंतिज़ार में हूँ सखी تو نہیں آئےگا یقین دلا میں بڑے انتشار میں ہوں سکھی شمع تو کب کی بجھ چکی ہے مگر میں تیرے انتظار میں ہوں سکھر — नज़र نظر इंतिशार - Confusion , Anxiety शमअ - Flame , Lamp 

से उड़ हो रहे तुम

 तुम परिंदे हो ऊँचे आसमाँ के और बहुत नीचे उड़ रहे हो तुम تم پرندے ہو اونچے آسماں کے اور بہت نیچے اُڑ رہے ہو تم थक के गिर जाओ'गे बहुत जल्दी जिस मशक़्क़त से उड़ रहे हो तुम تک کے گر جاؤگے بہت جلدی جس مشقّت سے اُڑ رہے ہو تم ― नज़र نظر

Literally

झाँके है चश्म-ए-जाँ से कोई जैसे भगवान हो literally جھانکے ہے چشم_جاں سے کوئی جیسے بھگوان ہو literally माँगता सौ जनम तप के बाद तुम वो वरदान हो literally مانگتا سو جنم تپ کے بعد تم وہ وردان ہو literally लोग कहने को कहते हैं पर तुम मेरी जान हो literally لوگ کہنے کو کہتے ہیں پر تم میری جان ہو literally — नज़र نظر

हैं हम

ایک مدت کے بعد دیکھے ہیں خان ایک مدت کے بعد سوئے ہیں ہم آپکو کیا پتہ ہمارا غم کتنے تنہا تھے کیسے رویے ہیں ہم एक मुद्दत के बाद देखे हैं ख़ाब एक मुद्दत के बाद सोये हैं हम आपको क्या पता हमारा ग़म कितने तन्हा थे कैसे रोये हैं हम ― नज़र نظر

2021

आने वाले ऐसे रस्ते से तू आना जाने वाला तेरे रस्ते में न आए آنے والے ایسے رستے سے تو آنا جانے والا تیرے رستے میں نہ آئے रौशनी भी उस क़दर तू साथ लाना जाने वाले के अँधेरे रह न पाए روشنی بھی اس قدر تو ساتھ لانا جانے والے کے اندھیرے رہ نہ پائے — नज़र نظر

बदला

पता बदला या रास्ता बदला या सलीक़ा-ए-दाख़िला बदला जज़्बे तुम तक जो अब पहुँचते नहीं दिल के जानिब तुम्हारे क्या बदला پتہ بدلہ یا راستہ بدلہ يا سلیقہ_داخلہ بدلہ جذبے تم تک جو اب پہنچتے نہیں دل کے جانب تمہارے کیا بدلہ — नज़र نظر सलीक़ा-ए-दाख़िला - Way of entry जज़्बे - Emotions जानिब - Side

ज़िन्दगी-शायरी

फ़रेब-ओ-बे-वफ़ाई ,झूठ, अना-ओ-कुफ़्र समझते हो तो आओ ज़िन्दगी सीखें इता ,इक्वा, तनाफ़ुर और शुतुरगुरबा समझते हो तो आओ शायरी सीखें  فریب_و_بے وفائی جھوٹھ انا_و_قدر سمجھتے ہو تو آؤ زندگی سیکھیں اتا اکوا تنافر اور شُترگربا سمجھتے ہو تو آپ شاعری سیکھیں — नज़र نظر अना - Ego कुफ़्र - Disbelief

तन्हा

मुझसे ख़फ़ा है मेरा मैं और मेरे जीने का सबब इस आलम-ए-बे-दर्द में तन्हा से भी तन्हा हूँ मैं रोने को कोई दर नहीं , सुनने को कोई सर नहीं ढाँढस न ख़ुद को ख़ुद का है गोया कोई मुर्दा हूँ मैं مجھسے خفا ہے میرا میں اور میرے جینے کا سبب اس عالم_بےدرد میں تنہا سے بھی تنہا ہوں میں رہنے کو کوئی در نہیں ، سننے کو کوئی سر نہیں دھندھس نہ خد کو خد کا ہے گویا کوئی مردہ ہو میں ― नज़र نظر सबब - Reason गोया - As if

मेरा अंदाज़ रहने दो

ये मेरे दिल की बातें हैं मेरा अंदाज़ रहने दो मेरे फूल और काँटें हैं मेरा अंदाज़ रहने दो मैं अपनी बात कहने को किसी को क्यूँ पढूँ दिन-रात मेरे दिन और रातें हैं मेरा अंदाज़ रहने दो  یہ میرے دل کی باتیں ہیں میرا انداز رہنے دو میرے پھول آور کانٹیں ہیں میرا انداز رہنے دو میں اپنی بات کہنے کو کسی کو کیوں پڑھوں دن رات میرے دن آور راتیں ہیں میرا انداز رہنے دو — नज़र نظر

इतिहास (ग़ज़ल)

एक बहुत पहले लिखी क़िता-बंद ग़ज़ल ... एक क़िता-बंद ग़ज़ल में कुछ ख़याल एक से ज़ियादा अशआर Series में कह कर कहे जाते हैं , जिसे दरअसल क़िता भी कहते हैं , और एक ग़ज़ल जिसमें एक या एक से ज़ियादा क़िता हों , उसे क़िता-बंद ग़ज़ल कहते हैं । #ghazal 'नज़र' कुछ ख़ास कहना है तभी तो दिल भी  सहमा है نظر کچھ خاص کہنا ہی تبھی تو دل بھی صحما ہے ज़ुबाँ  से  कह नहीं  सकता मुझे   आँखों  से   कहना  है زباں سے کہ نہیں سکتا مجھے آنکھوں سے کہنا ہے न कोई  लफ्ज़-ए-लब मैंने तुम्हें   ख़ामोश    सुनना  है ن کوئی لفز_لب میںنے تمہیں خاموش سننا ہے मोहब्बत  आग  है  गर  तो मुझे   शोलों  सा  बनना  है محبّت آگ ہے گر تو مجھے شعلوں سا بننا ہے मुझे  ना   इश्क़   करना  है न   मुझको  दर्द   सहना  है مجھے نا عشق کرنا ہے ن مجھکو درد سہنا ہی मेरी   तामीर   बुज़दिल  है मुझे  बस  ख़ुद में  रहना  है ...

ज़िन्दगी

ज़िन्दगी आसाँ तो थी मगर मुझको जीना ही आया नहीं زندگی آساں تو تھی مگر مجھکو جینا ہی آیا نہیں घर से दूर आया तो जाना ये मुझको सोना ही आया नहीं گھر سے دور آیا تو جانا یہ مُجھکو سونا ہی آیا نہیں वादे पे वादे करता रहा पर निभाना ही आया नहीं وادے پے وادے کرتا رہا پر نبھانا ہی آیا نہیں जो मुझे था पराया वो ही दरअसल था पराया नहीं جو مجھے تھا پرایا وو ہی دراصل تھا پرایا نہیں ज़िन्दगी आसाँ तो थी मगर मुझको जीना ही आया नहीं زندگی آساں تو تھی مگر مجھکو جینا ہی آیا نہیں ― नज़र نظر

सहरा

भूखे को एक रोटी भी जन्नत लगे प्यासे को एक क़तरा भी राहत लगे सब्ज़ को क्या पता दर्द-ए-सहरा 'नज़र' ख़ुद के बच्चे तलक जब इक आफ़त लगे بھوکھے کو ایک روٹی بھی جنّت لگے پیاسے کو ایک قطرہ بھی راحت لگے 'سبز کو کیا پتا درد ے صحرا 'نظر خد کے بچّے تلک جب اک آفت لگے — नज़र نظر क़तरा - Drop सब्ज़ - Greenary सहरा - Desert

New Year 2020

किसी को फिर से रुस्वा कर दिया है किसी का दिल दुखा के आ रहे हैं दिसंबर से छुड़ा के हाथ अपने मगर फिर जनवरी को दे चुके हैं کسی کو پھر سے رسوا کر دیا ہے کسی کا دِل دکھا کے آ رہے ہیں دسمبر سے چھڑا کے ہاتھ اپنے  مگر پھر جنوری کو دے چکے ہیں ― नज़र نذر

हंगामा ( क़ितअ )

शजर ने हर दफ़ा शादाब पत्तों की सहूलत को हज़ारों ज़र्द पत्तों को ज़मीं पे ला के छोड़ा है سجار نے ہر دفعہ شاداب پتوں کی سہولت کو ہزاروں زرد پتّوں کو زمیں پے لا کے چھوڑا ہے ज़मीं ने गर यहाँ शादाब पत्तों से वज़ाहत ली तो क्यूँ आवाज़ उट्ठी है तो क्यूँ हंगामा बरपा है زمیں نے گر یہاں شاداب پتّوں سے وضاحت لی تو کیوں آواز اُٹھّی ہے تو کیوں ہنگامہ برپا ہے — नज़र نذر शजर - Tree शादाब - Verdant , Green ज़र्द - Yellow , Pale वज़ाहत - Clarification #एक_ख़याल #CAB Analogy : शजर - Pak,Ban, Afganistan ज़मीं - India

जाल

फिर तेरी ज़ुल्फ़ के साये तले हैं फिर तेरी आँख में डूबे हुए हैं फिर तेरी सुर्ख़ लबों ने फाँसा फिर तेरी जाल में उलझे हुए हैं پھر تیری زلف کے سائے تلے ہیں پھر تیری آنکھ میں ڈوبے ہوئے ہیں پھر تیری سرخ لبوں نے پھنسا پھر تیری جال میں الجھے ہوئے ہیں — नज़र نذر सुर्ख़ - Red

फ़ुर्क़त

वो कहती है फ़ुर्क़त पे तुम लिखते हो ख़ूब पर फिर विसाल ओ वस्ल पर लिखते नहीं मैं कहता हूँ  फ़ुर्क़त थें वो बस  लफ्ज़ के तुम  अस्ल  में  तो  थे  वहीं  के  ही  वहीं وہ کہتی ہے فرقت پے تم لکھتے ہو خوب پر پھر وصال و وصل پر لکھتے نہیں میں کہتا ہوں فرقت تھیں وہ بس لفظ کے تم اصل میں تو تھے وہیں کے ہی وہیں ― नज़र फ़ुर्क़त - Separation विसाल - Union वस्ल - Meeting

बिंदी

तेरी बिंदी , तेरी आँखें , तेरा हर एक नक़्श ओ नाज़ मेरे बालीं में बैठें हैं ، मेरे सीने से लग कर हैं तेरी बातें , तेरा लहज़ा , तेरी हर इक अदा ए ख़ास मेरे अश्कों से लिपटे हैं , मेरी सांसों से बढ़ कर हैं  تیری بندی ، تیری آنکھیں ، تیرا ہر ایک نقش و ناز میری بالیں میں بیٹھیں ہیں ، میرے سینے سے لگ کر ہیں تیری باتیں ، تیرا لہذا ، تیری ہر اِک عدا ے خاص میرے اشکوں سے لپٹیں ہیں، میری سانسوں سے بڑھ کر ہیں — नज़र نذر 

हालात

तुम्हें मालूम भी है क्या मेरे हालात हैं जानाँ मैं हर इक शख़्स से पल्ला छुड़ाना चाहता हूँ बस न जाने क्यूँ मैं दुनियाँ भर से कटना चाहता हूँ और फ़क़त दिन रात तुमसे बातें करना चाहता हूँ बस تمہیں مالوم بھی ہے کیا میرے حالات ہیں جاناں میں ہر اک شخص سے پلّا چھڑانا چاہتا ہوں بس ن جانے کیوں میں دنیاں بھر سے کٹنا چاہتا ہوں اور فقت  دن  رات  تمسے باتیں کرنا  چاہتا  ہوں  بس  — नज़र

जौन एलिया

तू  मेरी  फ़ारिहा  नहीं  और  ना मैं   तेरा   जौन   एलिया   ही   हूँ हाँ , मगर  तुझमें हूँ  तुझी  सा  हूँ और बस ये कि तुझ ही सा ही हूँ   تو   میری    فریحہ   نہیں   اور    نہ میں   تیرا    جون   ایلیا    ہی    ہوں ہاں  مگر تجھمیں ہوں تجھی سا ہوں اور  بس یہ کی تجھ ہی  سا ہی ہوں — नज़र

लिखता हूँ

वो ही आँखें , वो ही सूरत , उसी परवर को लिखता हूँ  उसी में बस रहा हूँ सो मैं अपने घर को लिखता हूँ  वो ही शामें , वो ही रातें , उसी में है बसर मेरी  सियाही से मैं बस अपने उसी दिन-भर को लिखता हूँ  وو ہی آنکھیں وو  ہی صورت  اسی پرور کو لکھتا ہوں اسی  میں بس رہا ہوں سو  میں  اپنے  گھر کو  لکھتا ہوں وو ہی شامیں وو ہی راتیں اسی میں  ہے بسر میری سیاہی سے  میں بس اپنے اسی دن  بھر  کو  لکھتا ہوں — नज़र परवर - Protector