इतिहास (ग़ज़ल)
एक बहुत पहले लिखी क़िता-बंद ग़ज़ल ...
एक क़िता-बंद ग़ज़ल में कुछ ख़याल एक से ज़ियादा अशआर Series में कह कर कहे जाते हैं , जिसे दरअसल क़िता भी कहते हैं , और एक ग़ज़ल जिसमें एक या एक से ज़ियादा क़िता हों , उसे क़िता-बंद ग़ज़ल कहते हैं ।
#ghazal
'नज़र' कुछ ख़ास कहना है
तभी तो दिल भी सहमा है
نظر کچھ خاص کہنا ہی
تبھی تو دل بھی صحما ہے
ज़ुबाँ से कह नहीं सकता
मुझे आँखों से कहना है
زباں سے کہ نہیں سکتا
مجھے آنکھوں سے کہنا ہے
न कोई लफ्ज़-ए-लब मैंने
तुम्हें ख़ामोश सुनना है
ن کوئی لفز_لب میںنے
تمہیں خاموش سننا ہے
मोहब्बत आग है गर तो
मुझे शोलों सा बनना है
محبّت آگ ہے گر تو
مجھے شعلوں سا بننا ہے
मुझे ना इश्क़ करना है
न मुझको दर्द सहना है
مجھے نا عشق کرنا ہے
ن مجھکو درد سہنا ہی
मेरी तामीर बुज़दिल है
मुझे बस ख़ुद में रहना है
میری تعمیر بزدل ہے
مجھے بس خد میں رہنا ہے
तुम्हारे रंग देखूँगा
सो मुझको मर के बचना है
تمہارے رنگ دیخونگا
سو مجھکو مر کے بچنا ہے
तेरे दिल में तो सूखा है
मगर आँखों में क़तरा है
تیرے دل میں تو سوکھا ہے
مگر آنکھوں میں قطرہ ہے
निगाहों में यक़ीनन ही
तिरे कुछ राज़ गहरा है
نگاہوں میں یقیناً ہی
تیرے کچھ راز گہرا ہے
गुलिस्ताँ रश्क खाता है
अजब ख़ुदरंग सहरा है
گلستاں رشک کھاتا ہے
عجب خدرنگ صحرا ہے
मेरा दिल एक बंजर है
मगर शादाब चेहरा है
میرا دل ایک بنجر ہے
مگر شاداب چہرہ ہے
कदूरत छोड़ कर आना
जिगर पर सख़्त पहरा है
کدورت چھوڑ کر آنا
एक क़िता-बंद ग़ज़ल में कुछ ख़याल एक से ज़ियादा अशआर Series में कह कर कहे जाते हैं , जिसे दरअसल क़िता भी कहते हैं , और एक ग़ज़ल जिसमें एक या एक से ज़ियादा क़िता हों , उसे क़िता-बंद ग़ज़ल कहते हैं ।
#ghazal
'नज़र' कुछ ख़ास कहना है
तभी तो दिल भी सहमा है
نظر کچھ خاص کہنا ہی
تبھی تو دل بھی صحما ہے
ज़ुबाँ से कह नहीं सकता
मुझे आँखों से कहना है
زباں سے کہ نہیں سکتا
مجھے آنکھوں سے کہنا ہے
न कोई लफ्ज़-ए-लब मैंने
तुम्हें ख़ामोश सुनना है
ن کوئی لفز_لب میںنے
تمہیں خاموش سننا ہے
मोहब्बत आग है गर तो
मुझे शोलों सा बनना है
محبّت آگ ہے گر تو
مجھے شعلوں سا بننا ہے
मुझे ना इश्क़ करना है
न मुझको दर्द सहना है
مجھے نا عشق کرنا ہے
ن مجھکو درد سہنا ہی
मेरी तामीर बुज़दिल है
मुझे बस ख़ुद में रहना है
میری تعمیر بزدل ہے
مجھے بس خد میں رہنا ہے
तुम्हारे रंग देखूँगा
सो मुझको मर के बचना है
تمہارے رنگ دیخونگا
سو مجھکو مر کے بچنا ہے
तेरे दिल में तो सूखा है
मगर आँखों में क़तरा है
تیرے دل میں تو سوکھا ہے
مگر آنکھوں میں قطرہ ہے
निगाहों में यक़ीनन ही
तिरे कुछ राज़ गहरा है
نگاہوں میں یقیناً ہی
تیرے کچھ راز گہرا ہے
गुलिस्ताँ रश्क खाता है
अजब ख़ुदरंग सहरा है
گلستاں رشک کھاتا ہے
عجب خدرنگ صحرا ہے
मेरा दिल एक बंजर है
मगर शादाब चेहरा है
میرا دل ایک بنجر ہے
مگر شاداب چہرہ ہے
कदूरत छोड़ कर आना
जिगर पर सख़्त पहरा है
کدورت چھوڑ کر آنا
جگر پر سخت پہرہ ہے
परों को खोल कर देखो
क़फ़स ने सम्त बदला है
پیروں کو کھول کر دیکھو
قفس نے سمت بدلا ہے
गया कुछ भी नहीं अब तक
ज़रा सा शाम निकला है
گیا کچھ بھی نہیں اب تک
ذرا سا شام نکلا ہے
सितारे हो फ़लक के तुम
तुम्हे तो शब में खिलना है
ستارے ہو فلک کے تم
تمہیں تو شب میں کھلنا ہے
बदलना है मुझे सब कुछ
नया सा मुझको दिखना है
بدلنا ہے مجھے سبكچھ
نیا سا مجھکو دکھنا ہے
ज़मी संग आसमाँ रो दे
मुझे कुछ ऐसे मरना है
زمیں سنگ آسماں تو دے
مجھے کچھ ایسے مرنا ہے
फ़क़त बुझना नहीं जल के
मुझे इतिहास लिखना है
فقط بجھنا نہیں جل کے
مجھے اتہاس لکھنا ہے
― नज़र نظر
तामीर - Construction
क़तरा - Drop
गुलिस्ताँ - Garden
रश्क - Envy
सहरा - Desert
शादाब - Verdant , हरा-भरा
कदूरत - मैल , ill will
क़फ़स - Cage
सम्त - Direction
फ़लक - Sky
शब - Night
फ़क़त - Only
#एक_ख़याल
क़फ़स ने सम्त बदला है
پیروں کو کھول کر دیکھو
قفس نے سمت بدلا ہے
गया कुछ भी नहीं अब तक
ज़रा सा शाम निकला है
گیا کچھ بھی نہیں اب تک
ذرا سا شام نکلا ہے
सितारे हो फ़लक के तुम
तुम्हे तो शब में खिलना है
ستارے ہو فلک کے تم
تمہیں تو شب میں کھلنا ہے
बदलना है मुझे सब कुछ
नया सा मुझको दिखना है
بدلنا ہے مجھے سبكچھ
نیا سا مجھکو دکھنا ہے
ज़मी संग आसमाँ रो दे
मुझे कुछ ऐसे मरना है
زمیں سنگ آسماں تو دے
مجھے کچھ ایسے مرنا ہے
फ़क़त बुझना नहीं जल के
मुझे इतिहास लिखना है
فقط بجھنا نہیں جل کے
مجھے اتہاس لکھنا ہے
― नज़र نظر
तामीर - Construction
क़तरा - Drop
गुलिस्ताँ - Garden
रश्क - Envy
सहरा - Desert
शादाब - Verdant , हरा-भरा
कदूरत - मैल , ill will
क़फ़स - Cage
सम्त - Direction
फ़लक - Sky
शब - Night
फ़क़त - Only
#एक_ख़याल
Comments