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सफ़ल हैं ज़िन्दगी में आप (नज़्म)

मैं जानता हूँ ज़िंदगी में आगे बढ़ते रहना इक ज़रूरी अम्ल है  मैं जानता नहीं फ़क़त, मैं मानता भी हूँ कि ज़िंदगी में आगे बढ़ते रहना चाहिए मगर मैं फिर से कहता हूँ , ये आगे बढ़ते रहना है ज़रूरी ज़हन-ओ-सोच का  ज़मीर का ,नज़रिए का  नज़रिया एक ये भी है कि क़ैद कर परिन्दे को वो सब दो जिसके वास्ते वो जी रहा  मगर फिर ऐसा क्यूँ है वो, तुम्हारे पिंजरा खोलते ही तुमको छोड़ जाता है  नज़रिया एक ये भी है कि रोज़ इक परिन्दे को दिया करो ख़ुराक-ओ-प्यार  अजब नहीं वो तुमसे दूर जाने के बजाए पास आएगा  यही तो है ना सोच का,विचार का,नज़रिए और ज़हन का सहीह मायने में आगे बढ़ना फिर  नज़रिया एक ये भी है कि धर्म इक तुम्हारा ही सहीह और सच है बस  कोई भी ग़ैर धर्म है मज़ाक-ओ-झूठ सा तुम्हारे वास्ते  नज़रिया एक ये भी है कि जाति-धर्म कुछ नहीं  हर एक फ़र्द की वही बनावट और चाल है  बनाने वाले ने तो एक फ़र्क़ तक किया नहीं  तो तुमने जाति-धर्म का मुखौटा क्यूँ लगा लिया अना ये कैसी है,तुम्हारी धारणा ही सच है बस  अना ये कैसी है कि हम अलग-अलग पर एक हैं  नज़रिया एक ये भी है पुरानी मान्यताओं...

ज़िन्दगी

कैसे को मान लें हम जन्नत हसीं है अफ़ज़ल हम अपनी ज़िन्दगी को दिन रात देखते हैं کیسے کو ماں لیں ہم جنت حسیں ہے افضل ہم اپنی زندگی کو دن رات دیکھتے ہیں ― नज़र نظر अफ़ज़ल - सबसे उत्कृष्ट

सोच

तुम्हें गर सोचना है तो हमारी तरह सोचो फिर वगरना तुम हमारी ज़िन्दगी से दफ़ा हो जाओ تمہیں گر سوچنا ہے تو ہماری طرح سوچو پھر وگرنہ تم ہماری زندگی سے دفعہ ہو جاؤ — नज़र نظر

ज़िन्दगी-शायरी

फ़रेब-ओ-बे-वफ़ाई ,झूठ, अना-ओ-कुफ़्र समझते हो तो आओ ज़िन्दगी सीखें इता ,इक्वा, तनाफ़ुर और शुतुरगुरबा समझते हो तो आओ शायरी सीखें  فریب_و_بے وفائی جھوٹھ انا_و_قدر سمجھتے ہو تو آؤ زندگی سیکھیں اتا اکوا تنافر اور شُترگربا سمجھتے ہو تو آپ شاعری سیکھیں — नज़र نظر अना - Ego कुफ़्र - Disbelief

जी

आख़िरश तुमसे भी मेरा जी 'नज़र' भर ही गया जाने अब किसके सहारे ज़िन्दगी काटूँगा मैं آخرش تمسے بھی میرا جی نظر بھر ہی گیا جانے اب کسکے سہارے زندگی کاٹونگا میں — नज़र نظر

ज़िन्दगी

ज़िन्दगी आसाँ तो थी मगर मुझको जीना ही आया नहीं زندگی آساں تو تھی مگر مجھکو جینا ہی آیا نہیں घर से दूर आया तो जाना ये मुझको सोना ही आया नहीं گھر سے دور آیا تو جانا یہ مُجھکو سونا ہی آیا نہیں वादे पे वादे करता रहा पर निभाना ही आया नहीं وادے پے وادے کرتا رہا پر نبھانا ہی آیا نہیں जो मुझे था पराया वो ही दरअसल था पराया नहीं جو مجھے تھا پرایا وو ہی دراصل تھا پرایا نہیں ज़िन्दगी आसाँ तो थी मगर मुझको जीना ही आया नहीं زندگی آساں تو تھی مگر مجھکو جینا ہی آیا نہیں ― नज़र نظر

ज़िन्दगी

ज़िन्दगी इतनी भी संजीदा नहीं है जितनी पेश आती है अक्सर मेरे आगे زندگی اتنی بھی سنجیدہ نہیں ہے جتنی پیش آتی ہے اکثر میرے آگے — नज़र نظر

ज़िन्दगी

ज़िन्दगी की पुर-सुकूँ साँसों के ख़ातिर रात की ख़ालिस सियाही कर दी क़ुर्बान  زندگی کی پر - سکوں سانسوں کے خاطر رات کی خالص سیاہی کر کی قربان — नज़र نذر

मुआफ़ी

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इस क़दर कमतर हँसा हूँ ज़िन्दगी में रूठ कर ख़ुद ही मुआफ़ी मांग लेता हूँ ― नज़र

रंग ए बचपन

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रंग ए बचपन हर घड़ी शफ़्फ़ाफ़ दिखते हैं 'नज़र' कितनी  फ़ीकी सी है  ये रंग ए जवानी  ज़ीस्त की ― नज़र शफ़्फ़ाफ़ - Clear ज़ीस्त - Life

ज़िन्दगी

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इतने बेसब्र तुम क्यूँ भला , ज़िन्दगी कुछ नया लिख रही । उससे मुझको न तोड़े कोई , वो मिरी शाख़ सी दिख रही । ― नज़र