ज़िंदगी - Nazm/Song Lyrics



Mukhda ( 122 122 122 12 )

ये मुझको बता तू मेरी ज़िंदगी ,
मैं क्यूँ खड़ा हूँ वहीं का वहीं ,

Antara 1  ( 122 122 122 12 )

चला था मैं बनके तेरा हम-नवा ,
वफ़ा क्यूँ न पाया ये दिल फिर कभी,
लड़ा था मैं ज़ालिम ज़माने से फिर ,
क्यूँ कहता है बुज़दिल मुझे हम-ज़बी,

Antara 2 ( 122 122 122 12 )

तमन्ना सितारों की पाले थे हम ,
यूँ ढाया क्यूँ मुझपे सितम पे सितम ,
यूँ जज़्बा तो लड़ने की रखते हैं पर ,
सितम ने कहा ख़ुद न होगा वो कम ,
मगर लड़ रहा था इस उम्मीद से ,
कभी ना कभी तो ढलेगा ये ग़म ,

Mukhda ( 122 122 122 12 )

ये मुझको बता तू मेरी ज़िंदगी ,
मैं क्यूँ खड़ा हूँ वहीं का वहीं ,

Antara 3 ( 122 122 122 12 )

न पहलू में बैठी है किस्मत कभी ,
न अपना कोई बन सका हम-नशीं ,

Antara 4 ( 2122 122 )

फिर भी लड़ता रहा मैं ,
आहें भरता रहा मैं ,
थे तो गर्दिश में तूफाँ ,
पर सँवरता रहा मैं ,

Antara 5  ( 2122 122 )

ना तो टूटा कभी मैं ,
ना ही बिखरा कभी मैं ,
मुड़ के देखा जो पीछे ,
था वहीं का वहीं मैं ,

Antara 6 ( 122 122 122 12 )

अजब सा ही आलम हुआ मेरे संग ,
मैं बढ़ता रहा तू फिसलती रही ,

Mukhda ( 122 122 122 12 )

ये मुझको बता तू मेरी ज़िंदगी ,
मैं क्यूँ खड़ा हूँ वहीं का वहीं ।

— नज़र

हम-नवा - Friend
हम-ज़बी - That complete line means that the loser is saying to the writer that the writer is having the similar lines over the forehead as his.
हम-नशीं - Companion
गर्दिश - Circulation

#एक_ख़याल






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