अंदाज़

लिफ़ाफ़े खोल ख़तों के मैं हर्फ़ दर हर्फ़ सुनाता हूँ ,
'नज़र' कुछ यूँ मैं हर-शय को अज़ीज़ों को दिखाता हूँ ,
जिगर को चीर ज़ेहन को खोल परत सारे बिछाता हूँ ,
यही अंदाज़ हैं कुछ मेरे यूँ ही रिश्ते निभाता हूँ ।

― नज़र

हर्फ़ दर हर्फ़ - Letter by letter
हर-शय - everything
जिगर - Heart
ज़ेहन - Mind





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