कोई नही

सुर्ख़ आँख,बेसुकूँ ज़ेहन,मरहम कोई नही ,
फ़ज़ा को यक़ीं है कि मुझे ज़ख़म कोई नही ,
बताता गया हूँ तसलसुल से सबको यहाँ ,
जहाँ ए 'नज़र' में अब शुमार ए ग़म कोई नही ।

― नज़र

सुर्ख़ - Red
फ़ज़ा - Ambience ,वातावरण
तसलसुल - Sequence




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