कोई नही Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps February 19, 2019 सुर्ख़ आँख,बेसुकूँ ज़ेहन,मरहम कोई नही , फ़ज़ा को यक़ीं है कि मुझे ज़ख़म कोई नही , बताता गया हूँ तसलसुल से सबको यहाँ , जहाँ ए 'नज़र' में अब शुमार ए ग़म कोई नही । ― नज़र सुर्ख़ - Red फ़ज़ा - Ambience ,वातावरण तसलसुल - Sequence Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
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