सूली
सूली
~ मोहब्बत ये सूली चढ़ी है (नज़्म)~
इन आँखों में काँटें चुभें हैं
नसें ज़हन को दुख रही है
लहू चुभ रहें हैं जिगर में
ये साँसें भी जलने लगीं हैं
हैं बालीं पे बैठे अंधेरे
ये रातें भी डर सी गयीं हैं
ख़मोशी तड़पने लगी है
हवाओं में हलचल मची है
सितारे खड़े हैं फ़लक पे
क़मर की भी आँखें जलीं हैं
बदन ले रहा है कराहें
हलक़ तो ये जम सी गयी है
'नज़र' तूने क्या कह दिया है
कि रौशन शमा बुझ गयी है
कि ख़ुशबू सभी जा चुकी है ,
सभी करवटें थक चुकीं हैं
कि सिलवट सभी जग चुकीं हैं
परिन्दें सभी रो रहें हैं
सभी जुगनुएँ बुझ गयीं हैं
दोपहरी भी शब में खड़ी है
तो अश्कों की आँखें भड़ीं हैं
दिशायें सभी रो पड़ीं हैं
बेचैनी भी ज़िद पे अड़ी है
अजब बेरहम सी घड़ी है
यूँ ही रंग ओ आलम है जबसे
मोहब्बत ये सूली चढ़ी है ।
― नज़र
इन आँखों में काँटें चुभें हैं
नसें ज़हन को दुख रही है
लहू चुभ रहें हैं जिगर में
ये साँसें भी जलने लगीं हैं
हैं बालीं पे बैठे अंधेरे
ये रातें भी डर सी गयीं हैं
ख़मोशी तड़पने लगी है
हवाओं में हलचल मची है
सितारे खड़े हैं फ़लक पे
क़मर की भी आँखें जलीं हैं
बदन ले रहा है कराहें
हलक़ तो ये जम सी गयी है
'नज़र' तूने क्या कह दिया है
कि रौशन शमा बुझ गयी है
कि ख़ुशबू सभी जा चुकी है ,
सभी करवटें थक चुकीं हैं
कि सिलवट सभी जग चुकीं हैं
परिन्दें सभी रो रहें हैं
सभी जुगनुएँ बुझ गयीं हैं
दोपहरी भी शब में खड़ी है
तो अश्कों की आँखें भड़ीं हैं
दिशायें सभी रो पड़ीं हैं
बेचैनी भी ज़िद पे अड़ी है
अजब बेरहम सी घड़ी है
यूँ ही रंग ओ आलम है जबसे
मोहब्बत ये सूली चढ़ी है ।
― नज़र
ज़ेहन - Mind
जिगर - Heart
बालीं - सिरहाना
फ़लक - Sky
सिलवट - wrinkle
क़मर - Moon
सूली - Gallow
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