काश

चमकते  बूंद  हैं  तन पे , हैं गीले  गेसुएँ  उसकी ,  बदन पे  है  शरम पहना ,
'नज़र' गर काश ऐसा हो , वो मेरी प्यास बन जाये , ज़रा सी बेशरम हो के ।

— नज़र



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