हो गया ( ग़ज़ल )
वो भी उस भीड़ में शामिल हो गया ,
हार कर कमबख़त जाहिल हो गया ।
यूँ न था मगर् हाल ए दिल लिखना ही ,
जाने कब मेरा शौक़ ए दिल हो गया ।
इश्क़ ने कुछ दिया गर तो ये कि मैं ,
वक़्त से पहले ही कामिल हो गया ।
मेरा कमरा मुझे देखता भी नहीं ,
जैसे जबरन ही मैं दाख़िल हो गया ।
मैंने जैसे ही ख़ुद को झूठा किया ,
मैं अचानक बहोत क़ाबिल हो गया ।
वो मेरे दस्तरस में है तो नहीं ,
मगर् मैं तो उसे हासिल हो गया ।
फ़िक्र में फ़िक्र के फँस के रह गया ,
ख़ुशमिज़ाजी का ख़ुद क़ातिल हो गया ।
मुझको साहिल गवारा तो है 'नज़र' ,
पर मेरा मौज ही साहिल हो गया ।
हार कर कमबख़त जाहिल हो गया ।
यूँ न था मगर् हाल ए दिल लिखना ही ,
जाने कब मेरा शौक़ ए दिल हो गया ।
इश्क़ ने कुछ दिया गर तो ये कि मैं ,
वक़्त से पहले ही कामिल हो गया ।
मेरा कमरा मुझे देखता भी नहीं ,
जैसे जबरन ही मैं दाख़िल हो गया ।
मैंने जैसे ही ख़ुद को झूठा किया ,
मैं अचानक बहोत क़ाबिल हो गया ।
वो मेरे दस्तरस में है तो नहीं ,
मगर् मैं तो उसे हासिल हो गया ।
फ़िक्र में फ़िक्र के फँस के रह गया ,
ख़ुशमिज़ाजी का ख़ुद क़ातिल हो गया ।
मुझको साहिल गवारा तो है 'नज़र' ,
पर मेरा मौज ही साहिल हो गया ।
― नज़र
कामिल - Mature
दस्तरस - Reach
साहिल - Coast , किनारा
गवारा - Acceptable
मौज - Wave

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