के लिए जाँ ( ग़ज़ल )



मिरी आँखों की इस नमी के लिए जाँ ,
ज़रा   मुस्कुरा दो  इसी  के  लिए  जाँ ।

जला  दूँगा  अपने ग़ुरूर ओ अना भी ,
मैं  रौशन तिरी  इक हँसी के लिए जाँ ।

मुझे भीख में  ही  हँसी अपनी  दे  जा ,
दिवाने  के  तेरे   ख़ुशी  के  लिए   जाँ ।

मिरी जान  मुझसे  न रूठा  करो  तुम ,
मिरे  हँस  रही  ज़िन्दगी  के  लिए जाँ ।

मैं रोता हूँ  कितना  तुम्हें क्या  बताऊँ ,
तिरे  एक  लफ़्ज़ ए हँसी  के  लिए जाँ ।

मैं  अश्कों में  तेरे  कदम  पे  झुका  हूँ ,
मिरे  रातों  के   बे-कली  के  लिए  जाँ ।

ख़ुदा  के   लिए  बे-रुख़ी से  न  जाना ,
मिरी  चीखती  बे-बसी   के  लिए  जाँ ।

शिकायत है सबकी मैं कम बोलता हूँ ,
हूँ  जोकर सा  तेरी हँसी  के  लिए जाँ ।

मिरी  जान बारिश करो ना  हँसी  की ,
मिरे  होंठों  की  तिश्नगी के  लिए  जाँ ।

ज़रा ख़ुशमिज़ाजी से आओ न जानाँ ,
मिरी  बुझती सी  रौशनी के  लिए जाँ ।

'नज़र'  बारहा  कोसता  है  ख़ुदी  को ,
तिरे ग़म , तिरी  बे-रुख़ी  के लिए  जाँ ।

― नज़र


अना - Ego
बे-कली - Restlessness
तिश्नगी - Thirst
बारहा - Again and again 

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