लायक

दिल तड़पता है मेरा सुनने को तेरे लफ़्ज़ पर ,
मैं तेरे नज़रों से नीचे आ गिरा हूँ फ़र्श पर ,
तेरे क़दमों पे मैं गिर के फूट कर रोना तो चाहूँ ,
पर तेरे क़दमों के लायक भी नहीं तेरा 'नज़र' ।

― नज़र



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