लुट गयें ( ग़ज़ल )

मैं पहुँचता ही कि सारे  लुट  गयें
फिर से सब रंग-ओ-नज़ारे  लुट गयें
میں پہنچتا ہی کِ سارے لٹ گئیں
پھر سے سب رنگ_و_نظارے لٹ گئیں

मैं   ख़ुमार-ए-चाँद   में    खोया   रहा
और   मिरे   सारे   सितारे   लुट   गयें
میں خمار_چاند میں کھویا رہا
اور میرے سارے ستارے کت گئیں

चुन  लिया था  क़त्ल के  सामान  को 
बेच  कर  ख़ुद  को  बिचारे  लुट  गयें 
چن لیا تھا قتل کے سامان کو 
بیچ کر خد کو بیچارے لٹ گئیں

जो  सबब  जाना  अमावस  का  तभी
आसमाँ   के   सब   कँवारे   लुट  गयें
جو سبب جانا اماوس کا تبھی 
آسماں کے سب کنوارے لٹ گئیں

इक   सहारे   को बढ़ाया हाथ जब
बस तभी   वो   बे-सहारे   लुट  गयें 
اِک سہارے کو بڑھایا ہاتھ جب
بس تبھی وو بے سہارے لٹ گئیں

अब  यूँ  ही  लहरों  में  जीना  है  मुझे
सारे    के   सारे   किनारे    लुट   गयें
اب یوں ہی لہروں میں جینا ہے مجھے 
سارے کے سارے کنارے لٹ گئیں

आसमाँ तक हम 'नज़र'अब जायें क्यूँ
ख़ाब    तो    सारे    हमारे   लुट   गयें
آسماں تک ہم 'نظر' اب جائیں کیوں
خان تو سارے ہمارے لٹ گئیں 

― नज़र نظر

ख़ुमार-ए-चाँद - Madness of moon 
सबब - Reason

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