तलक ( ग़ज़ल )

आँख  भर आई  उन्हें  सुनते  तलक ,
दर्द   काफ़ी   थे   वहाँ   चेहरे  तलक ।

तुम  मेरा  दिल  जीत लेना  मेरी  जाँ ,
तुमसे  ये  मेरी   नज़र   उतरे  तलक ।

शक सिया तक पे किया ख़ुद राम ने ,
इस   जहाँ   में  आदमी  होने  तलक ।

है  मेरी  ख़ाहिश   तू   बस  मेरी  रहे ,
कम से कम  जानाँ मेरे  मरने तलक ।

सब्ज़ को चाहा जो बस दिल जान से ,
अब्र  ख़ुद ही  आ गयी  सहरे  तलक ।

क़ीमती  मैं  होने  को  हूँ  तब  ही  तो ,
ख़ुद समंदर  आ  गया  क़तरे  तलक ।

चाँद   तारे  भी  बदल  जायेंगे  क्या ,
सोच  मेरे  मुल्क़  का   बदले  तलक ।

― नज़र

सब्ज़ - Greenery
अब्र - Cloud
सहरा - Desert
क़तरा - Drop


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