को है ( ग़ज़ल )
ज़मीं पे आज इक तन्हा सितारा टूटने को है
दुआ में ख़ास कोई कुछ तो उससे माँगने को है
زمیں پہ آج اک تنہا ستارہ ٹوٹنے کو ہے
دعا میں خاص کوئی کچھ تو اسے مانگنے کو ہے
मुझे अब चाहिए मैं ख़ुद ही कोई रास्ता ढूंढूँ
मैं जिस डाली से लिपटा था वो मुझसे छूटने को है
مجھے اب چاہیے میں خود ہی کوئی راستہ ڈھونڈھوں
میں جس ڈالی سے لپٹا تھا وو مجھسے چھوٹنے کو ہے
जिसे मैंने मेरे सब ज़ख़्म और मरहम अता की थी
वो चारागर ही मेरे मरहमों को लूटने को है
جسے مینے میرے سب زخم اور مرہم اتا کی تھی
وہ چراگر ہی میرے مرحموں کو لوٹنے کو ہے
रियासत और दौलत भाइयों में बाँट तो डाला
मगर वो फ़ुर्क़त ए माँ बाप तक को बाँटने को है
ریاست اور دولت بھائیوں میں بانٹ تو ڈالا
مگر وہ فرقت ے ماں باب تک کو بانٹنے کو ہے
रवानी ख़ूब थी लहरों में पर डूबी न वो कश्ती
सो कश्ती को समंदर ख़ुद किनारा सौंपने को है
روانی خوب تھی لہروں میں پر دوبئی ن وہ کشتی
سو کشتی کو سمندر خد کنارا سونپنے کو ہے
ज़माने भर में अम्न ओ शाद की इक रौशनी होगी
अमावस ख़ास को इक चाँद ऐसे देखने को है
زمانے بھر میں امن و ہرش کی اک روشنی ہوگی
اماوس خاص کو اِک چند ایسے دیکھنے کو ہے
'नज़र' मेरी ज़ुबाँ तो शल है कब से पर है ये इलहाम
मेरी आवाज़ पूरे आसमाँ में गूँजने को है
' نذر ' میری زباں تو شل ہے کب سے پر ہے یہ الہام
میری آواز پورے آسماں میں گونجنے کو ہے
— नज़र نذر
चारागर - Healer , Doctor
फ़ुर्क़त - Separation
रवानी - Speed , Flow
अम्न - Peace
शाद - Happiness
शल - Insensitive
इलहाम - Intuition
दुआ में ख़ास कोई कुछ तो उससे माँगने को है
زمیں پہ آج اک تنہا ستارہ ٹوٹنے کو ہے
دعا میں خاص کوئی کچھ تو اسے مانگنے کو ہے
मुझे अब चाहिए मैं ख़ुद ही कोई रास्ता ढूंढूँ
मैं जिस डाली से लिपटा था वो मुझसे छूटने को है
مجھے اب چاہیے میں خود ہی کوئی راستہ ڈھونڈھوں
میں جس ڈالی سے لپٹا تھا وو مجھسے چھوٹنے کو ہے
जिसे मैंने मेरे सब ज़ख़्म और मरहम अता की थी
वो चारागर ही मेरे मरहमों को लूटने को है
جسے مینے میرے سب زخم اور مرہم اتا کی تھی
وہ چراگر ہی میرے مرحموں کو لوٹنے کو ہے
रियासत और दौलत भाइयों में बाँट तो डाला
मगर वो फ़ुर्क़त ए माँ बाप तक को बाँटने को है
ریاست اور دولت بھائیوں میں بانٹ تو ڈالا
مگر وہ فرقت ے ماں باب تک کو بانٹنے کو ہے
रवानी ख़ूब थी लहरों में पर डूबी न वो कश्ती
सो कश्ती को समंदर ख़ुद किनारा सौंपने को है
روانی خوب تھی لہروں میں پر دوبئی ن وہ کشتی
سو کشتی کو سمندر خد کنارا سونپنے کو ہے
ज़माने भर में अम्न ओ शाद की इक रौशनी होगी
अमावस ख़ास को इक चाँद ऐसे देखने को है
زمانے بھر میں امن و ہرش کی اک روشنی ہوگی
اماوس خاص کو اِک چند ایسے دیکھنے کو ہے
'नज़र' मेरी ज़ुबाँ तो शल है कब से पर है ये इलहाम
मेरी आवाज़ पूरे आसमाँ में गूँजने को है
' نذر ' میری زباں تو شل ہے کب سے پر ہے یہ الہام
میری آواز پورے آسماں میں گونجنے کو ہے
— नज़र نذر
चारागर - Healer , Doctor
फ़ुर्क़त - Separation
रवानी - Speed , Flow
अम्न - Peace
शाद - Happiness
शल - Insensitive
इलहाम - Intuition
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