आफ़त (ग़ज़ल)

क्या अजीब-ओ-ग़रीब आफ़त है
वही बेचैनी ,वो ही राहत है
کیا عجیب_و_غریب آفت ہے
وہی بےچینی ، وو ہی راحت ہے
वो मेरी नफ़रतों की नफ़रत है
यानी वो इक हसीन आदत है
وو میری نفرتوں کی نفرت ہے
یعنی وو اک حسین عادت ہے
टूट जाएगी मेरी नींद उस बिन
वो मेरे ख़ाब की ज़रूरत है
ٹوٹ جائےگی میری نیند اس بن
وو میرے خان کی ضرورت ہے
तू मेरी है प' मैं तेरा न हुआ
बस इसी बात पर तो लानत है
تو میری ہے پ میں تیرا ن ہوا
بس اسی بات پر تو لعنت ہے
तुमने दीये जलाये ही कहाँ थे
तुमको किस बात से शिकायत है
تمنے دیئے جلائے ہی کہاں تھے
تمکو کس بات سے شکایت ہے
होंठ ,ज़ुल्फ़ ,आरिज़,आँखें,जिस्म,तराश
तेरा हर एक शय क़यामत है
ہونٹھ،زلف،عارض،آنکھیں،جسم،تراش
تیرا ہر ایک شے قیامت ہے
जी रहा हूँ मैं उससे मर-मर के
यूँ समझ लो कि इक बुरी लत है
جی رہا ہوں میں اس سے مر مر کے
یوں سمجھ لو ک اک بری لت ہے
क्या अयादत को मेरी आओ'गी
गर तुम्हें इक ज़रा सी फुरसत है
کیا عیادت کو میری آؤ گی
گر تمہیں اک ذرا سی فرصت ہے
दरमियाँ में न हो अगर जो इश्क़
हर ख़ुशी भी तब इक अज़ीयत है
درمیاں میں ن ہو اگر جو عشق
ہر خوشی بھی تب اک اذیّت ہے
आँखों में आँख और हाथों में हाथ
या ख़ुदा क्या अजब सी फ़ुर्क़त है
آنکھوں میں آنکھ اور ہاتھوں میں ہاتھ
یا خدا کیا عجب سی فرقت ہے
क़ुर्ब में हो अगर जो इश्क़ 'नज़र'
फिर दुखांँ तक भी इक सबाहत है
'قرب میں ہو اگر جو عشق 'نظر
پھر دُکھاں تک بھی اک صباحت ہے

— नज़र نظر

आरिज़ - Cheeks
शय - Thing
अयादत - To ask for the well being of a sick
अज़ीयत - Pain, Torment
फ़ुर्क़त - Separation
क़ुर्ब - Nearness
खिजाँ - Autumn
सबाहत - Beauty

#एक_ख़याल

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