कुछ कर दिखा (ग़ज़ल)

जो बुझ गएँ वो भूल जा कुछ कर दिखा
तू फिर से कुछ शमएँ जला कुछ कर दिखा
جو بجھ گئیں وو بھول جا کچھ کر دکھا
تو پھر سے کچھ شمعیں جلا کچھ کر دکھا
ये याद रख इंसाँ से आला कुछ नहीं
तो उठ ज़रा ,सब को बता, कुछ कर दिखा
یہ یاد رکھ انساں سے آلا کچھ نہیں
تو اٹھ ذرا ، سب کو بتا ، کچھ کر دکھا
ये वायरस कुछ पल को है ,मिट जाएगा
रख हौसला और दिल लगा कुछ कर दिखा
یہ وائرس کچھ پل کو ہے ، مٹ جائیگا
رکھ حوصلا اور دل لگا کچھ کر دکھا
सब जुगनुएँ भी बुझ गईं इस रात में
सो अबकी तू ही जगमगा कुछ कर दिखा
سب جگنوئیں بھی بجھ گئیں اس رات میں
سو ابکی تو ہی جگمگا کچھ کر دکھا
ये आसमाँ बस इक सराब-ए-ज़र्फ़ है
तू इनसे आगे बढ़ ज़रा कुछ कर दिखा
یہ آسماں بس اِک سراب ے ظرف ہے
تو انسے آگے بڑھ ذرا کچھ کر دکھا
सुनता रहा है तू 'नज़र' लोगों की बस
अबकी ज़रा अपनी सुना कुछ कर दिखा
سنتا رہا ہے تو 'نظر' لوگوں کی بس
ابکی ذرا اپنی سنا کچھ کر دکھا

— नज़र نظر

सराब-ए-ज़र्फ़ - Mirage of Capability


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