नहीं बदला ( ग़ज़ल )
जो मेरे घर से उसके घर को जाता था नहीं बदला
बहुत बदले नज़ारे पर वो इक रस्ता नहीं बदला
جو میرے گھر سے اسکے گھر کو جاتا تھا نہیں بدلا
بہت بدلے نظارے پر وہ اِک رستہ نہیں بدلا
दशक बदला सड़क बदली मकाँ बदला मकीं बदले
मगर उस कूचे में दिल का सहम जाना नहीं बदला
دشک بدلا سڑک بدلی مکاں بدلا ملیں بدلے
مگر اس کوچہ میں دل کا سحم جانا نہیں بدلا
तेरी सूरत के जानिब था तेरी सूरत के जानिब है
तुझे किस तौर समझाएँ मेरा क़िबला नहीं बदला
تیری صورت کے جانب تھا تیری صورت کے جانب ہے
تُجھے کس طور سمجھائیں میرا قبلہ نہیں بدلا
वो दुख जो कल को होता था वही अब तक को बैठा है
बहुत शहर-ओ-मकाँ बदले प' सिरहाना नहीं बदला
وہ دُکھ جو کل کو ہوتا تھا وحی اب تک کو بیٹھا ہے
بہت شہر_و_مکاں بدلے پ سرہانہ نہیں بدلا
ख़ुदा को जिसने पहली मर्तबा देखा सभी बदले
भरी महफ़िल तेरा दीवाना इकलौता नहीं बदला
خدا کو جسنے پہلی مرتبہ دیکھا سبھی بدلے
بھری محفل تیرا دیوانہ اکلوتا نہیں بدلا
भला हम किस तरह पागल उसे महसूस करने को
जो मुद्दत से कोई कमरा कोई कोना नहीं बदला
بھلا ہم کس طرح پاگل اُسے محسوس کرنے کو
جو مدت سے کوئی کمرہ کوئی کونا نہیں بدلا
हमारे दाग़-धब्बे कुछ नहीं दिखते हमें उसमें
तभी तो घर में सब बदला मगर शीशा नहीं बदला
ہمارے داغ دھبّے کچھ نہیں دیکھتے ہمیں اُسمیں
تبھی تو گھر میں سب بدلا مگر شیشہ نہیں بدلا
हमें हैरत नहीं इसपर कि डूबे जा रहा है मुल्क
प' हैरत है किसी अख़बार का चेहरा नहीं बदला
ہمیں حیرت نہیں اسپر کِ ڈوبے جا رہا ہے مُلک
پ حیرت ہے کسی اخبار کا چہرہ نہیں بدلا
हुआ था तय किसी सूरत नहीं बदलेंगे हम दोनों
ज़माना भी मगर हैरत है हम जितना नहीं बदला
ہوا تھا تے کسی صورت نہیں بدلینگے ہم دونوں
زمانہ بھی مگر حیرت ہے ہم جتنا نہیں بدلا
वही बिन्दी,वही आँखें,वही नादान सी सूरत
मेरे आगे 'नज़र' जन्नत का पैमाना नहीं बदला
وحی بندی وحی آنکھیں وحی نادان سی صورت
میرے آگے 'نظر' جنّت کا پیمانہ نہیں بدلا
― नज़र نظر
कूचा - A Narrow Street
मकीं - Inhabitants
जानिब - Towards
क़िबला - The direction towards the Kaaba particularly the direction of prayer for the Namaz
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