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सफ़ल हैं ज़िन्दगी में आप (नज़्म)

मैं जानता हूँ ज़िंदगी में आगे बढ़ते रहना इक ज़रूरी अम्ल है  मैं जानता नहीं फ़क़त, मैं मानता भी हूँ कि ज़िंदगी में आगे बढ़ते रहना चाहिए मगर मैं फिर से कहता हूँ , ये आगे बढ़ते रहना है ज़रूरी ज़हन-ओ-सोच का  ज़मीर का ,नज़रिए का  नज़रिया एक ये भी है कि क़ैद कर परिन्दे को वो सब दो जिसके वास्ते वो जी रहा  मगर फिर ऐसा क्यूँ है वो, तुम्हारे पिंजरा खोलते ही तुमको छोड़ जाता है  नज़रिया एक ये भी है कि रोज़ इक परिन्दे को दिया करो ख़ुराक-ओ-प्यार  अजब नहीं वो तुमसे दूर जाने के बजाए पास आएगा  यही तो है ना सोच का,विचार का,नज़रिए और ज़हन का सहीह मायने में आगे बढ़ना फिर  नज़रिया एक ये भी है कि धर्म इक तुम्हारा ही सहीह और सच है बस  कोई भी ग़ैर धर्म है मज़ाक-ओ-झूठ सा तुम्हारे वास्ते  नज़रिया एक ये भी है कि जाति-धर्म कुछ नहीं  हर एक फ़र्द की वही बनावट और चाल है  बनाने वाले ने तो एक फ़र्क़ तक किया नहीं  तो तुमने जाति-धर्म का मुखौटा क्यूँ लगा लिया अना ये कैसी है,तुम्हारी धारणा ही सच है बस  अना ये कैसी है कि हम अलग-अलग पर एक हैं  नज़रिया एक ये भी है पुरानी मान्यताओं...

नहीं (ग़ज़ल)

तू उसे इसलिए बस भूला नहीं दूसरा कोई मयस्सर था नहीं تو اُسے اسلئے بس بھولا نھیں دوسرا کوئی میسّر تھا نہیں जाने क्या नाम था उस शहर का दोस्त सिवा इक शक्ल के कुछ देखा नहीं جانے کیا نام تھا اُس شہر کا دوست سوا اک شکل کے کچھ دیکھا نہیں कुछ अजब लोग बता के सभी को कहते हैं फिर किसी से कहना नहीं کچھ عجب لوگ بتا کے سبھی کو کہتے ہیں پھر کسی سے کہنا نہیں उसमें ज़िन्दा है मुसलसल तो क्या वास्ते तेरे वो गर ज़िन्दा नहीं اُسمیں زندہ ہے مسلسل تو کیا واسطے تیرے وہ گر زندہ نہیں चर्चा-ए-शहर था बेटे का अमल रस्म-ए-गिर्या में भी वो रोया नहीं چرچاِ شہر تھا بیٹے کا عمل رسمِ گِرْیہ میں بھی وہ رویا نہیں उससे बढ़कर नहीं नफ़रत किसी से उससे बढ़कर कभी कोई था नहीं اُسّے بڑھکر نہیں نفرت کسی سے اُسّے بڑھکر کبھی کوئی تھا نہیں चाँद हासिल किया है जुगनू फिर कौन कहता है मेरे बस का नहीं چاند حاصل کیا ہے جُگنو پھر کوں کہتا ہے مِرے بس کا نہیں मौत बस एक बहाना है 'नज़र' लोग मिट जाते हैं या तो या नहीं موت بس ایک بہانہ ہے 'نظر' لوگ مٹ جاتے ہیں یا تو یا نہیں — नज़र نظر मयस्सर - Available मुसलसल - Continuously अमल - Act गिर्...

सच

सच लिख तो लेंगे एलिया तुम जैसा ही मगर हमसे जहाँ की नफ़रतें झेली न जाएगी سچ لکھ تو لینگے ایلیا تم جیسا ہی مگر ہمسے جہاں کی نفرتیں جھیلی نہ جائےگی — नज़र نظر

वैज्ञानिक

सुख़नवर कोई भी बन सकता है बच्चों तुम्हें बनना है वैज्ञानिक मेरे प्यारों سخنور کوئی بھی بن سکتا ہے بچّوں تمہیں بننا ہے ویگیانک میرے پیاروں — नज़र نظر

रतजगे

हुए हो रतजगे गर तुम किसी की इन्तज़ारी में वो तुमसे कुछ भी करता हो मोहब्बत कर नहीं सकता ہوئی ہو رتجگے گر تم کسی کی انتظاری میں وہ تمسے کچھ بھی کرتا ہو محبّت کر نہیں سکتا ― नज़र نظر

नफ़रत

मुझे तुमसे है नफ़रत यूँ अगर मेरी मोहब्बत भी तुम्हें गर रास आयी तो मुझे उससे भी नफ़रत है مجھے تمسے ہے نفرت یوں اگر میری محبّت بھی تمہیں گر راس آئی تو مجھے اس سے  بھی نفرتیں — नज़र نظر

शायर

महताब और शराब क़वाफ़ी बना के लोग शायर क़रार दे रहे हैं ख़ुद को आज कल مہتاب اور شراب قوافی بنا کے لوگ شاعر قرار دے رہے ہیں خد کو آج کل — नज़र نظر

दर्द

दर्द का संभलना ज़रूरी होता है लहज़ा ए दर्द में कोई नहीं लिखता درد کا سنبھالنا ضروری ہوتا ہے لہذا ے درد میں کوئی نہیں لکھتا — नज़र نذر लहज़ा ए दर्द - Instant/Moment of pain 2222 2222 22

हो ( ग़ज़ल )

नहीं तुम वो नहीं जो मेरे आगे पेश आती हो न जाने क्यूँ मेरे आगे पस ए पर्दा हो जाती हो نہیں تم وہ نہیں جو میرے آگے پیش آتی ہو ن جانے کیوں میرے آگے پس ے پردا ہو جاتے ہو तुम्हारा मसअला ये है मुझे अफ़सुर्दगी क्यूँ है मुझे तुम क्यूँ तुम्हारे यार के क़िस्से सुनाती हो تمہارا مسالا یہ ہے مجھے افسردگی کیوں ہے مجھے تم کیوں تمہارے یار کے قصّے سناتی ہو जिहालत से शगुफ़्ता फूल कोई हो नहीं सकता तो फिर तुम क्यूँ गुलाबों को मेरे ख़्वाबों में लाती हो جہالت سے شگفتہ پھول کوئی ہو نہیں سکتا تو پھر تم کیوں گلابوں کو میرے خوابوں میں لاتی ہو मेरे आगे तेरी बातें निकाह ओ शादमानी के मेरे पीछे इन्हीं बातों से फिर सबको हँसाती हो میرے آگے تیری باتیں نکاح و شادمانی کے میرے پیچھے انہیں باتوں سے پھر سب کو ہنسانے ہو नए इस यार के लब के हँसी ओ शाद के ख़ातिर किसी की पाक चाहत को सहूलत से जलाती हो نئے اس یار کے لب کے ہنسی و شاد کے خاطر کسی کی پاک چاہت کو سہولت سے جلاتی ہو कोई माशूक़ सी सूरत बहन में देखता है फिर तुम उस हैवान की क़ुर्बत को फिर क्यूँ गिड़गिड़ाती हो کوئ معشوق سی صورت بہن میں دکھتا ہے پھر ...

हसरत

जो दिल ‌जाँ से तुझे चाहे ख़ुदा तुझको अता कर दे कि मेरे  दिल से तेरे जिस्म की हसरत न जाएगी کو دل جاں سے تجھے چاہے خدا تجھکو آتا کر دے کِ میرے دل سے تیرے جسم کی حسرت ن جائےگی — नज़र نذر

हिसार ए हवस

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मोहब्बत है तुमसे दिलो जाँ से मुझको तुम्ही ज़िन्दगी ओ क़ज़ा भी हो मेरी तकल्लुफ़ करें क्यूँ ये कहने में तुमसे हिसार ए हवस में भी तुम ही हो मेरी ― नज़र क़ज़ा - Death हिसार ए हवस - Circle of lust

अँधेरे की लौ

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फिर अँधेरे की मुकम्मल लौ जलेगी देखना , फिर चराग़ों  के तले  होंगे सियासी  देखना । ― नज़र सियासी - Politicians