शायरी

सोच  रक्खा  था  नहीं  करनी  मुझे  अब  शायरी 
नक्श ओ नाज़ ए जाँ ही ऐसी है बताओ क्या करें

— नज़र

नक्श ओ नाज़ ए जाँ - Charm and Beauty of Beloved



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