काश

नींद  की  जैसे  तलब सी  है उसे सो ,
काश !  मेरे  होंठों  पे  वो  नींद  होती ।

शर्म से लिपटी सी रहती है फ़क़त वो ,
काश ! बेशर्म सी  वो मेरे साथ सोती ।

— नज़र




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