ख़्वाहिश

लाख ख़्वाहिश में मेरी ये भी है ख़्वाहिश
नींद इक शब मुझको तुझसे पहले आये

रात  भर   हम  बातें  ही बातें  करें और
सुबह भी उस रोज़  थोड़ा  थम के आये

― नज़र

शब - Night



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