वो लड़की ( नज़्म )
~ वो लड़की ( नज़्म ) ~
अलग रात थी वो ,अलग थी वो लड़की
अलग तौर से ही मैं उससे मिला था
अजब वक़्त-ओ-लहज़े में मुझसे मिली थी
अजब आश्नाई थी बातों में उसके
अलग ही कशिश उसने पहना था मानो
मैं उसकी तरफ़ जैसे खिंचने लगा था
परी सी कोई जादूगरनी हो जैसे
अजब लर्ज़िशें दिल में होने लगी थी
यूँ मानो कि दस्तक दिया हो किसी ने
मैं उसमें नहीं था , वो मुझमें नहीं थी
मगर कुछ हमें खींचती जा रही थी
ख़ुदा की थी नेमत या कोई तसव्वुफ़
कोई उन्स या आसमानी तअल्लुक
या कोई तिलिस्मी हसीं रब्त थी वो
या सालिम मोहब्बत के एहसास थें वो
न जाने वो क्या चीज़ थी दरमियाँ में
मगर जो भी थी वो बहोत ही अलग थी
उसी की तरह मुनफ़रिद थें वो एहसास
जहाँ भर से बिल्कुल अलग थी वो लड़की
वो यकता सी लड़की मेरे पास है अब
है तामीर ऐसी कि जैसे परी हो
मेरे ख़्वाब जैसी है बिल्कुल वो लड़की
बहोत अलाहिदा है , अजब पुरकशिश है
'नज़र' मुख़्तलिफ़ है हर इक बात उसकी
कभी मेरी माँ सी मुझे डांटती है
कभी एक नादान बच्ची सी लगती
कभी शोख़ मस्ती है बातों में उसके
कभी बातें बाबा सी संजीदा कहती
कभी हीर जैसी वो माशूक़ है तो
कभी पेश आती है मीरा के जैसी
कभी नकचढ़ी जैसा बरताव करती
कभी एक ख़ामोश दरिया हो जाती
कभी फूल झड़ते हैं लफ़्ज़ों से उसके
कभी बिजलियों सी बरसती है मुझपे
कहा ना अलग है , बहोत ही अलग है
सदाक़त की मीठी सी तस्वीर है वो
मोहब्बत की जैसे कोई हीर है वो
वो हँसती है तो ज़िन्दगी मेरी हँसती
जो रोए तो फिर ज़िन्दगी मेरी रोए
मेरी ज़िन्दगी जा बसी है उसी में
वो ख़ुद भी तो मुझमें ही आ बस चुकी है
मैं सोहबत में उसके निखरने लगा हूँ
ख़ुदा ओ मोहब्बत की नेमत सी है वो
बहोत मुनफ़रिद है ,बहोत ही जुदा है
ग़म-ए-दिल में है मेरे अश्कों के जैसी
ख़ुशी में वो है इक तबस्सुम के जैसी
समझती है मुझको अँधेरों से ज़्यादा
मुझे चाहती है वो मुझसे भी ज़्यादा
हवा चाहती है किसी लौ को जैसे
सितारों को जैसे ये शब चाहते हैं
कि जैसे धनक को ये बरसात चाहे
मोहब्बत मगर वो जताती नहीं है
कभी दिख भी जाए मोहब्बत जो उसकी
वो पगली शरम से छुपाती है उसको
कहा ना अलग है , बहोत ही अलग है
वो रूठे तो जैसे ख़ुदा रूठता है
न सुनती है कुछ भी न कहती है कुछ भी
मेरे बस में कुछ भी न रहता है मानो
मगर वो मुझे भी ख़ुदा मानती है
सो कुछ पल को ही रूठती है वो मुझसे
वो रोये तो मुझको बताती नहीं है
जो ख़ुश हो तो पहले बताती है मुझको
मेरी फ़िक्र मुझसे भी ज़्यादा है उसको
मेरे ग़म में रोती है मुझसे भी ज़्यादा
मेरे ख़ुश में हँसती है मुझसे भी ज़्यादा
मगर कुछ भी मुझको जताती नहीं है
कहा ना अलग है , बहोत ही अलग है
यूँ मानो कि हर इक अदा उसकी यकता
वो लड़की नहीं अब , मेरी जान-ओ-दिल है
वो तब भी अलग थी , वो अब भी अलग है ।
― नज़र
वक़्त-ओ-लहज़ा - Time and moment
आश्नाई - companionship
कशिश - Attraction
लर्ज़िश- Tremble ,To Shake
नेमत - Gift
तसव्वुफ़ - Mysticism
उन्स - attachment
तिलिस्मी - Magical
रब्त - Connection
सालिम - Perfect
मुनफ़रिद - Unique
यकता - Unique
तामीर - Construction
अलाहिदा - Separate , अलग
पुरकशिश - Attractive
मुख़्तलिफ़ - Diffrent
शोख़ - Playful , Naughtiness, Mischievous
सदाक़त - Truth , सच्चाई
सोहबत - company, साथ
तबस्सुम - Smile
शब - Night
धनक - Rainbow
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