Rape In India (Nazm)

कुछ इक शम्मे जलेंगे और कुछ दिन लोग चीखेंगे ,
कुछ इक अख़बार जागेंगे , कुछ इक आँसू भी छलकेंगे ,
कुछ इक तो धर्म की पट्टी से आँखों को ही ढ़क लेंगे ,
तो कुछ बंदिश लगा देंगे परिन्दों की उड़ानों पे ,
कोई पिंजरे में रख देगा तो कोई बांध देंगे पंख ,
कुछ इक पल आसमाँ पे पहरे-दारी भी बढ़ा देंगे ,
मगर जो आलम-ए-कल था वो ही फिर कल का भी होगा !

न हम हैं शाह , न मसनद पे ,न ही है आसमाँ पे ज़ोर ,
जो कोई आसमाँ के इन परिन्दों को कभी नोचे ,
कभी काटे ,कभी कुचले कभी बे-जान कर छोड़े ,
तो हम ये हुक्म दे दें या कोई कानून ही कर दें ,
सलाख़ों के बजाए सब के सब के सर क़लम कर दो !
मगर हम जानते हैं कुछ भी ऐसा हो नहीं सकता ,
वो सब जो आलम-ए-कल था वो ही फिर कल का भी होगा ।

― नज़र نذر

शम्मा - Flame
शाह - King
मसनद - Seat of Honour

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