इश्क़

वो इश्क़ फिर है ही नहीं जिसमें हो हसरत जिस्म की 

हसरत है गर जो जिस्म की तो जा किसी कोठे पे जा 

وہ عشق پھر ہے ہیں نہیں جسمیں ہو حسرت جسم کی 

حسرت ہے گر جو جسم کی تو جا کسی کوٹھے پے جا


― नज़र نظر

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