पल (नज़्म)
इस पल में है सब कुछ जाने-जहाँ
हम भी हैं यहीं तुम भी हो यहाँ
आँखों में तुम्हारे आँख हैं और
हाथों में तुम्हारे हाथ तपाँ
अब इससे ज़ियादा क्या चाहें
ढ़लने न सके ये रुत ये समाँ
वो बारिश क्या वो क्या सावन
जिसमें न तुम्हारे नक़्श-अयाँ
वो क्या शबनम वो फूल ही क्या
जिसपर न तुम्हारे लम्स हो जाँ
वो क्या जन्नत वो कैसी बहार
जब तुम न रवाँ जब तुम न वहाँ
इस पल में है सब कुछ जाने-जहाँ
हम भी हैं यहीं तुम भी हो यहाँ
वो हुस्न ही क्या वो कैसी हूर
गर सिर से पाँव वो तुम सी नहीं
वो क्या मरहम वो कैसी दवा
जब चश्म-ए-सुकूँ को तुम ही नहीं
वो क्या दरवाज़ा कैसी सुराख़
जब मिल ही न पाएँ दोनों मकाँ
ऐ काश कि ऐसा हो पाए
हम सुनते रहें तुम्हें शीरीं-ज़ुबाँ
ऐ काश की ऐसा हो पाता
तुम सोचते ही हो जाती अयाँ
इस पल में है सब कुछ जाने-जहाँ
हम भी हैं यहीं तुम भी हो यहाँ
वो कैसे ख़िज़ाँ वो कैसे फ़क़ीर
जिस पर हो तुम्हारे रंग-ओ-निशाँ
वो क्यूँ सहरा वो क्यूँ बंजर
जिसपर हो तुमहारे अक्स-फ़शाँ
इस वक़्त है हम पर रब माइल
इस वक़्त है हमको ख़ुद पे गुमाँ
इस पल में है सब कुछ जाने-जहाँ
हम भी हैं यहीं तुम भी हो यहाँ
इतनी सी तमन्ना है कि रहें
हम तुम में निहाँ , तुम हम में निहाँ
ताउम्र तुम्हारा साथ रहे
तुम हम में रवाँ , हम तुम में रवाँ
इस पल में है सब कुछ जाने-जहाँ
हम भी हैं यहीं तुम भी हो यहाँ
आँखों में तुम्हारे आँख हैं और
हाथों में तुम्हारे हाथ तपाँ
अब इससे ज़ियादा क्या चाहें
ढ़लने न सके ये रुत ये समाँ
इस पल में है सब कुछ जाने-जहाँ
हम भी हैं यहीं तुम भी हो यहाँ
― नज़र
तपाँ - Growing Hot
नक़्श-अयाँ - Visible Imprint
शबनम - Dew
लम्स - Touch
बहार - Spring Season
चश्म - Eyes
शीरीं-ज़ुबाँ - One having sweet voice
अयाँ - To become visible , प्रकट
ख़िज़ाँ - Autumn
सहरा - Desert
अक्स-फ़शाँ - Scattering reflection
माइल - Inclined
निहाँ - Hidden
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