दर्द-ए-इश्क़ ( नज़्म )



तुमको इक दिन ये मोहब्बत याद आएगी
और फिर बातें मेरी तुमको रुलाएँगी
नींद फिर रातों में तुमको भी न आएगी
और मेरी चाहतें तुमको सताएँगी

लाख आयेंगे मोहब्बत ले के तुम तक पर
इश्क़ मेरे जैसा तुमसे कर न पायेंगे
कुछ पलों को लब पे तेरे वो सजेंगे पर
उम्र भर तेरे लबों पे रह न पायेंगे

आज तुमको जो मोहब्बत दर्द लगती है
कल तुम्हें अश्कों में वो शब भर हँसाएँँगी
तुमको इक दिन ये मोहब्बत याद आएगी
और फिर बातें मेरी तुमको रुलाएँगी

झूठ के जज़्बात तुमको रास आयेंगे
रात दिन तेरे लबों को वो हँसाएँँगे 
कुछ पलों को तुम भी उनमें गुम हो जाओगी
और फिर यूँ हीं मुझे तुम भूल जाओगी

फिर किसी दिन सारे झूठे जज़्ब टूटेंगे 
और मलाल ओ ग़म में तेरे अश्क छूटेंगे
फिर तुम्हें उस रोज़ बस हम याद आयेंगे 
तब तलक हम दूर पीछे छूट जायेंगे

हर पहर हर पल फ़क़त तुम मुझको ढूँढोगी
पर मोहब्बत लौट कर वापस न आएगी
तुमपे लिक्खी फिर मेरी ग़ज़लें पढ़ोगी तुम
फिर वो ही ग़ज़लें मेरी चाहत बताएँगी

तुमको इक दिन ये मोहब्बत याद आएगी
और फिर बातें मेरी तुमको रुलाएँगी

छूट कर तुमसे मैं ख़ुद भी जी न पाउँगा
रात दिन बस नाम तेरा रटता जाऊँगा
पागलों से हाल मेरे हो चुके होंगे
तुम बुलाओगी मगर तब भी न आऊँगा

हाँथ में तस्वीर तेरी ले के मैं पागल
बारहा तस्वीर से तुझको मिलाऊँगा
तुम मुझे छूने को मेरे पास आओगी
पर मैं तुमसे डर के छुप के बैठ जाऊँगा

चश्म ए तर में दौड़ती तुम लौट जाओगी
और मेरे हाल से ख़ुद को रुलाओगी
नींद फिर रातों में तुमको भी न आएगी
और मेरी चाहतें तुमको सताएँगी

तुमको इक दिन ये मोहब्बत याद आएगी
और फिर बातें मेरी तुमको रुलाएँगी 

― नज़र

अश्क - Tears
शब - Night
जज़्ब - Emotion , Feeling
चश्म ए तर - Eyes Full of Tears
बारहा - Many Times , बार - बार

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